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सामरिक भागीदारी मॉडल से भारत में बनेंगी 6 परंपरागत पनडुब्बियां, नौसेना ने इच्छुक कंपनियों से मंगवाए प्रस्ताव

रक्षा मंत्रालय ने सामरिक भागीदारी मॉडल (एसपी) के तहत 6 परम्परागत पनडुब्बियों के निर्माण की इच्छुक निजी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों से उनके चयन को लेकर प्रस्ताव (ईओआई) मंगवाए हैं।

Six conventional submarines will be built in India by strategic partnership model.
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Six conventional submarines will be built in India (Photo Source:ANI)

रक्षा मंत्रालय ने सामरिक भागीदारी मॉडल (एसपी) के तहत 6 परम्परागत पनडुब्बियों के निर्माण की इच्छुक निजी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों से उनके चयन को लेकर प्रस्ताव (ईओआई) मंगवाए हैं। मंत्रालय द्वारा गुरुवार को दी गई जानकारी के मुताबिक यह वह कंपनियां होंगी जो इस कार्य में किसी विदेशी कंपनी के साथ मिलकर भारत में इन डीजल चालित पनडुब्बियों का निर्माण करना चाहेंगी।

मंत्रालय के इस कदम से भारत की पनडुब्बी डिजाइन से लेकर उसके निर्माण करने तक की क्षमता में इजाफा होगा। साथ ही मेक इन इंडिया अभियान के जरिए इस क्षेत्र में देश आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ेगा। इस परियोजना पर कुल 45 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे। इससे निजी क्षेत्र को सशस्त्र सेनाओं के लिए जरूरी सामरिक उपकरणों और तकनीक को विकसित करने से जुड़ी हुई क्षमता का विकास होगा।

डीएसी ने दी मंजूरी

प्रोजेक्ट-75 (इंडिया) नामक इस प्रस्ताव को रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने इसी साल 31 जनवरी को मंजूरी दी थी। अब जिस भारतीय कंपनी का चयन किया जाएगा। उसके बारे में रक्षा मंत्रालय और नौसेना की वेबसाइट पर जानकारी अपलोड कर दी जाएगी। इसके दो सप्ताह के भीतर वास्तविक उत्पाद निर्माता (ओईएम) यानि विदेशी कंपनी के चयन की जानकारी भी सार्वजनिक कर दी जाएगी।

गौरतलब है कि एसपी मॉडल के तहत मंत्रालय द्वारा स्वीकृत किया गया यह दूसरा प्रस्ताव है। इससे पहले नौसेना के लिए ही 111 नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों (एनयूएच) की खरीद को लेकर एसपी मॉडल के तहत एक प्रस्ताव को विभागीय स्वीकृति दी जा चुकी है।

लगेगी मैन्युफैक्चरिंग लाइन

एसपी मॉडल के तहत भारतीय कंपनी के साथ जो भी विदेशी कंपनी इस निर्माण कार्य के लिए चुनी जाएगी। उसके लिए यह अनिवार्य होगा कि वह भारत में पनडुब्बियों के लिए एक पूर्ण समर्पित मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करेगी। जिससे भारत विश्व में पनडुब्बियों के डिजाइन और निर्माण के मामले में ग्लोबल हब यानि आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगा। प्रोजेक्ट-75 (आई) के तहत इसका देश में लगभग आगाज हो जाएगा।

इसके अलावा नौसेना के पास यह विकल्प भी रहेगा कि वह इस प्रोजेक्ट के तहत 6 और पनडुब्बियों का निर्माण भी कर सकती है। इसके जरिए केवल पनडब्बी निर्माण और जहाज बनाने वाले उद्योग क्षेत्र को ही फायदा नहीं होगा। बल्कि मैन्युफैक्चिरिंग खासतौर पर कलपुर्जों, पनडुब्बी के उपकरणों से जुड़े हुए सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र को भी लाभ होगा। कुल मिलाकर इससे देश में एक बेहतर औद्योगिक इको-सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।

अहम होगा टीओटी

इस मसले पर लगभग दो महीने में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन सी भारतीय कंपनी किस विदेशी कंपनी के साथ मिलकर पनडुब्बियों का निर्माण करने जा रही है। भारतीय कंपनियों का चयन उनके किसी अन्य सिस्टम में शामिल होने की क्षमता, शिपबिल्डिंग निर्माण के मामले में विशेषज्ञता और वित्तीय ताकत का आकलन करने के बाद किया जाएगा।

जबकि विदेशी कंपनियों में से किसी एक को चुनने के लिए यह देखा जाएगा कि वह कंपनी नौसेना की जरूरतों के हिसाब से फिट बैठती है या नहीं, तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) और स्वदेशी कंटेंट के मामले में क्वालीफाई करती है या नहीं।

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