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बड़ी रिपोर्ट: पीएम केअर्स फंड पर RTI का PMO ने नहीं दिया जवाब, जानें पूरा मामला

पीएमओ याचिका लगाकर आरटीआई के तहत पूछा गया कि बीती 1 मार्च से लेकर जून तक कितने लोगों ने पीएमओ में आरटीआई दाखिल की।

बड़ी रिपोर्ट: पीएम केअर्स फंड पर RTI का PMO ने नहीं दिया जवाब, जानें पूरा मामला
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कोरोना महामारी के बीच प्रधानमंत्री ने पीएम केयर्स पीएम केयर्स फंड की स्थापना की थी । जिसमें लोग कोरोना महामारी के लिए पीएम केयर्स फंड में दान करते हैं। जिसको लेकर देशभर के कई याचिकाकर्ताओं ने आरटीआई लगाई और पीएमओ से जवाब मांगा।

वहीं इस बीच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमओ याचिका लगाकर आरटीआई के तहत पूछा गया कि बीती 1 मार्च से लेकर जून तक कितने लोगों ने पीएमओ में आरटीआई दाखिल की। जिसके जवाब में पीएमओ ने सवाल का जवाब दिया। लेकिन पीएमओ ने पीएम केयर्स फंड से जुड़ी जानकारी शेयर करने से साफ इनकार कर दिया।

जानकारी के लिए बता दें कि पीएमओ ने पीएम केयर्स फंड से जुड़ी जांच का रिकॉर्ड नहीं रखा बताया है। साथ में यह भी बताया कि पीएम केयर्स पीएमओ के पास 1 मार्च से जून तक 4 महीने के अंदर 3852 आरटीआई दाखिल की गई। हर दिन 32 याचिकाएं दायर की गई। जिसमें तरह-तरह के सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन वहीं जब आरटीआई के तहत पीएम केयर फंड के बारे में पीएमओ से पूछा गया तो उसने कहा कि वह इसकी जानकारी नहीं रखता है। पीएमओ की ओर जवाब दिया गया कि 1 मार्च से 30 जून तक 3852 RTI के आवेदन मिले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महामारी से निपटने के लिए मंगाई गई पीएम-केयर फंड पर एक रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई आवेदन पर कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है। आवेदन आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर किया गया था। जो अप्रैल 2020 से पीएमओ द्वारा प्राप्त और निपटाए गए आरटीआई आवेदनों और अपीलों की संख्या और पीएम-केआरईएस और प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत से संबंधित ऐसे आवेदनों की संख्या के बारे में जानकारी का अनुरोध करता है।

हालांकि इन दोनों फंडों से संबंधित आरटीआई आवेदनों की संख्या के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। आपके द्वारा मांगी गई जानकारी इस कार्यालय में संकलित रूप में नहीं रखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पीएमओ के मुख्य सार्वजनिक सूचना अधिकारी ने कहा कि इसका संग्रह और संकलन इस कार्यालय के संसाधनों को अपने सामान्य कार्यों के कुशल निर्वहन से अलग करेगा। कुछ पिछले मुख्य सूचना आयुक्तों ने आरटीआई अधिनियम के तहत इस जानकारी का उपयोग सूचना के प्रारूप पर बदलने के लिए किया जा सकता है।

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