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पीएम मोदी ने चौरी-चौरा कांड के शहीदों को याद कर किसानों का किया जिक्र, कही ये बड़ी बात...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौरी-चौरा कांड के शताब्दी वर्ष समारोह का किया उद्घाटन। यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कार्यक्रम में वर्चुअली शिरकत की, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य समारोह स्थल चौरी चौरा से जुड़े।

पीएम मोदी ने चौरी-चौरा कांड के शहीदों को याद कर किसानों का किया जिक्र, कही ये बड़ी बात...
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौरी-चौरा कांड शताब्दी समारोह का दिल्ली से वर्चुअली उद्घाटन किया। यूपी के सीएम योगी मुख्य स्थल से इस कार्यक्रम के साथ वर्चुअली जुड़े।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने चौरी-चौरा कांड के शताब्दी वर्ष समारोह (Chauri Chaura Centenary Celebrations) का नई दिल्ली से ऑनलाइन उद्घाटन किया। चौरी-चौरा कांड के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने डाक टिकट और विशेष आवरण भी जारी किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जहां चौरी-चौरा कांड के शहीदों को याद किया, वहीं स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक किसानों के योगदान का जिक्र करना भी नहीं भूले।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चौरी-चौरा के संघर्ष में भी किसानों की बड़ी भूमिका थी। देश की तरक्की में किसानों ने अहम योगदान किया है। किसानों आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पिछले 6 सालों में लगातार प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट में देशवासियों पर कोई बोझ नहीं बढ़ाया गया। देश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने इस बजट में ज्यादा से ज्यादा खर्च करने का निर्णय लिया है। देश में चौड़ी सड़के बनाने, नई बसें और रेल चलाने के अनेक फैसले इस बजट में लिए गए हैं। युवाओं को ज़्यादा अच्छे अवसर मिलेंगे।

पीएम ने कोरोना काल में दुनियाभर को भारत की ओर से पहुंचाई जा रही मदद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'कोरोना काल में भारत ने 150 से ज्यादा देशों को मदद के लिए दवाइयां भेजी हैं। भारत खुद कोरोना की वैक्सीन बना रहा है और दुनियाभर में वैक्सीन पहुंचा रहा है। इससे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की आत्मा को गर्व महसूस होता होगा।

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने चौरी-चौरा में देश के लिए बलिदान देने वालों को प्रणाम कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। पीएम ने कहा, 100 वर्ष पहले चौरी-चौरा में जो हुआ, वो सिर्फ एक आगजनी की घटना या एक थाने में आग लगाने की घटना नहीं थी। चौरी-चौरा का संदेश बहुत बड़ा था। चौरी-चौरा कांड में आग थाने में नहीं लगी थी, बल्कि जन-जन के दिलों में प्रज्ज्वलित हो चुकी थी। चौरी-चौरा के ऐतिहासिक संग्राम को आज जो स्थान दिया जा रहा है, उसके लिए योगीजी और उनकी टीम को बधाई देता हूं।

उन्होंने कहा कि आज से शुरू हो रहे कार्यक्रम पूरे साल आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान चौरी-चौरा के साथ ही हर गांव, हर क्षेत्र के वीर बलिदानियों को भी याद किया जाएगा। देश की आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करते समय ऐसे समारोह का होना इसे और भी प्रासंगिक बना देता है।

ये है चौरी-चौरा कांड

महात्मा गांधी के आह्वान पर शुरू हुए असहयोग आंदोलन के समर्थन में 4 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा कस्बे में लोग जुलूस निकाल रहे थे। इस दौरन पुलिस ने उन पर फायरिंग कर दी, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए। इससे जनाक्रोश भड़क गया। आक्रोशित लोगों ने थाने को बाहर से कुंडी लगाकर आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। महात्मा गांधी ने इस घटना के बाद असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। बाद में चौरी-चौरा कांड के जिम्मेदार 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। वकील पंडित मदन मोहन मालवीय ने इन लोगों की तरफ से पैरवी की। 151 लोग फांसी की सजा से बच गए, लेकिन 19 लोगों को फांसी पर लटका दिया गया। इन लोगों की याद में चौरी-चौरा में शहीद स्मारक बनाया गया था।

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