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भारतेन्दु हरिश्चंद्र की 135वीं पुण्यतिथि आज, जानें उनकी जिंदगी से जुड़ी 5 बातें

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म 9 सितंबर 1850 बनारस के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनका निधन 6 जनवरी को हुआ था। वो अपनी सदी के सबसे उन्नत कवियों में शामिल थे।

भारतेन्दु हरिश्चंद्र की 135वीं पुण्यतिथि आज, जानें उनसी जुड़ी 5 बातेभारतेंदु हरिश्चंद्र की 135वीं पुण्यतिथि (फाइल फोटो)

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के पुरोधा भारतेंदु हरिश्चंद्र की आज 135वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में आज उनसे जु़ड़ी कुछ बातें बताएंगे। भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म 09 सितंबर, 1850 को बनारस में हुआ था। उनके पिता गोपाल चंद्र भी एक कवि थे। पिता की नसीहत पर ही वो आगे बढ़े। उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को कम उम्र में खो लेकिन पंद्रह साल की उम्र में उनके साथ पुरी के जगन्नाथ मंदिर जाने का अवसर मिला। जिसने उनकी जिंदगी ही बदल दी। उन्होंनेहिंदी गद्य को एक नई शैली दी है। उनका महत्व इस तथ्य से स्पष्ट रूप से वहन किया जाता है कि हिंदी साहित्य की एक अवधि उनके नाम पर है।

जानें उनकी जिंदगी से जुड़ी 5 खास बातें...

1-साहित्य के जन्मदाता भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितम्बर 1850 को काशी (यूपी) में हुआ था। हरिश्चंद्र प्रसिद्ध इतिहासकार सेठ अमीचंद की प्रपौत्र गोपालचंद्र के जेष्ठ पुत्र थे। हरिश्चंद्र जब 5 साल के थे तब उनकी माता का देहांत हुआ और जब हरिश्चंद्र 10 साल के थे तब उनके पिता चल बसे। 13 वर्ष की छोटी सी अवस्था में इनका विवाह काशी के रईस लाला गुलाब राय की पुत्री मन्ना देवी से हुआ था।

2-भारतेन्‍दु ने पॉंच वर्ष की अल्‍पायु में ही काब्‍य-रचना कर सभी को आश्‍चर्यचकित कर दिया था।

3-भारतेंदु हरिश्चंद्र वार के अनुसार कागज का प्रयोग करते थे। रविवार को गुलाबी, सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को सफेद और शनिवार को नीले रंग के कागज का इस्तेमाल करते थे।

4-तेज़ याददाश्त और स्वतंत्र सोच रखने वाले भारतेन्दु को कई भारतीय भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने अपनी मेहनत से संस्कृत, पंजाबी, मराठी, उर्दू, बांग्ला, गुजराती भाषाएँ सीखीं।

5.हिंदी में नाटकों का प्रारम्भ भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने किया था।

Shagufta Khanam

Shagufta Khanam

Jr. Sub Editor


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