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Article 370: सुप्रीम कोर्ट से गुलाम नबी आजाद को राहत, केंद्र सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 हटाने के बाद लगे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है।

Article 370:  सुप्रीम कोर्ट से गुलाम नबी आजाद को राहत, केंद्र सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में धारा 370 हटाने के बाद लगे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली 8 याचिकाओं पर आज सुनवाई हुई। जिसमें जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाने और राष्ट्रपति शासन लगाने की वैधता और प्रतिबंध शामिल हैं।

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे पहले वाइको की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर के हालात अब कैसे हैं। केंद्र सरकार से कहा कि आपने अभी तक कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया है। इस याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है।

फारुक अब्दुल्ला की हिरासत पर नोटिस

वहीं दूसरी तरफ फारूख अब्दुल्ला की हिरासत को लेकर भी कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। आखिर उन्हें हिरासत में क्यों रखा गया है। जबकि गृह मंत्रालय ने कहा था कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्य टीम याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की याचिका भी शामिल थी।

पहले का मामला

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के बाद प्रतिबंध के दौरान दो बार राज्य का दौरा करने वाले गुलाम नबी आजाद को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। वहीं दूसरी तरफ जम्मू और कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस पार्टी के नेता सज्जाद लोन की याचिका भी शामिल है।

सज्जाद लोन ने केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका में कहा कि अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति से जारी किया गया लेकिन फिर भी वहां पर कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। अनुच्छेद 370 (1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया आदेश सीओ 272 जम्मू और कश्मीर की सरकार की सहमति से जारी हुआ है। जम्मू और कश्मीर में लोकप्रिय निर्वाचित सरकार नहीं होने के बावजूद, संविधान के प्रावधान और यह भारत के संविधान पर एक टकराव है और भारतीय संविधान की संघीय प्रकृति पर एक गंभीर हमला है।

जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र के फैसलों को चुनौती देते हुए, जेकेपीसी ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम और राष्ट्रपति के आदेशों को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने के लिए एक दिशा निर्देश की मांग की।

पार्टी ने कहा कि राज्य में 2018 से संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन के अधीन था और राज्य सरकार के नियमित निर्णय राज्यपाल द्वारा लिए जाते रहे। वहीं इसके अलावा एनसी पार्टी ने राज्य की संवैधानिक स्थिति में किए गए परिवर्तनों के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती दी है।

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