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देश में त्योहारों के बीच बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल के दिनों में बनारस में इफ्तार के बाद गंगा में अवशेष प्रवाहित करने को लेकर विवाद और मध्यप्रदेश के छतरपुर में मंदिर के बाहर दुकान लगाने को लेकर हुए विवाद ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।

जहां कभी त्योहार मेलजोल और साझा संस्कृति का प्रतीक होते थे, वहीं अब कई जगहों पर विवाद और टकराव की खबरें सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अधूरी जानकारी और अफवाहें माहौल को और संवेदनशील बना रही हैं। छोटे-छोटे घटनाक्रम भी तेजी से बड़े विवाद में बदल जाते हैं, जिससे समाज में दूरी बढ़ती जा रही है।

भारत की पहचान उसकी विविधता और सह-अस्तित्व में रही है, लेकिन बदलते माहौल में यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या हम उस संतुलन को बनाए रख पा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है-
देशभर में आखिर क्यों बढ़ रहा है सांप्रदायिक तनाव? क्या खतरे में है भारत का सामाजिक ताना-बाना?

इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

Debate Panel

  • अतीकुर्रहमान – मुस्लिम रिसर्चर
  • सुरेंद्र राजपूत – प्रवक्ता, कांग्रेस
  • महंत राम दूत दास – हिंदू धर्मगुरु
  • डॉ. चिंतामणि मालवीय – पूर्व सांसद एवं विधायक, भाजपा

इस खास पेशकश में किसने क्या कहा? ऊपर दिए गए वीडियो में देखिए पूरी बहस।

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