​केंद्र सरकार 2029 से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है। केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक को अमलीजामा पहनाने के साथ-साथ लोकसभा सीटों के परिसीमन की दिशा में बड़े कदम उठाने की तैयारी में है।

ताजा जानकारी के अनुसार, साल 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं को 33 प्रतिशत (1/3) आरक्षण मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए सरकार एक नया संविधान संशोधन लाने की योजना बना रही है, जिसके जरिए न केवल महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होंगी, बल्कि देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या में भी भारी बढ़ोतरी की जाएगी।

​2011 की जनगणना बनेगा आधार: 816 तक पहुंच सकती है संख्या 
सीटों के नए परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को मुख्य आधार बनाया जा सकता है। यदि यह फॉर्मूला लागू होता है, तो निचले सदन यानी लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो सकती है।

इस विस्तार का सबसे बड़ा लाभ महिला अभ्यर्थियों को मिलेगा, क्योंकि कुल 816 सीटों में से 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। यह कदम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को निचले स्तर से सीधे नीति-निर्धारण के केंद्र तक ले आएगा।

​यूपी-बिहार और केरल: राज्यों में सीटों का नया गणित 
सीटों की संख्या बढ़ने से सर्वाधिक प्रभाव उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में देखने को मिलेगा। प्रस्तावित बदलावों के अनुसार:

उत्तर प्रदेश: वर्तमान में यहाँ 80 लोकसभा सीटें हैं, जो बढ़कर 120 हो सकती हैं।

बिहार: यहाँ सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 होने का अनुमान है।

केरल: दक्षिण भारत के इस राज्य में सीटें 20 से बढ़कर 30 हो सकती हैं।

यह विस्तार जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व को और अधिक संतुलित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे बड़े राज्यों की राजनीतिक धमक और बढ़ेगी।

​SC/ST आरक्षण में भी होगा बड़ा इजाफा

सीटों की कुल संख्या बढ़ने के साथ ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का कोटा भी स्वतः बढ़ जाएगा।

​अनुसूचित जाति (SC): वर्तमान में आरक्षित 84 सीटों की संख्या बढ़कर 126 तक जा सकती है।

अनुसूचित जनजाति (ST): इनके लिए आरक्षित सीटें 47 से बढ़कर 70 होने के आसार हैं।

यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि समाज के हर वर्ग को बढ़ी हुई सीटों के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

​छोटे राज्यों के लिए विशेष 'रोटेशन' फॉर्मूला

​जिन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में लोकसभा की केवल 1 या 2 सीटें हैं, वहाँ महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सरकार 'रोटेशन' का सहारा ले सकती है।

ऐसे क्षेत्रों में हर तीसरे चुनाव में सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में भी महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को समान अवसर प्राप्त हों।