PM Narendra Modi Kolkata Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता की सड़कों पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेगा रैली से महज कुछ घंटे पहले केंद्रीय कोलकाता के गिरिश पार्क इलाके में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। यह हिंसक झड़प उस वक्त हुई जब भाजपा समर्थक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाली प्रधानमंत्री की रैली में शामिल होने जा रहे थे। देखते ही देखते गिरिश पार्क का इलाका युद्ध का मैदान बन गया, जहां दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी और नारेबाजी हुई। ब्रिगेड परेड ग्राउंड से महज 5 किलोमीटर दूर हुई इस घटना ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झड़प के दौरान हुई पत्थरबाजी में एक पुलिस अधिकारी और एक भाजपा नेता समेत कई लोग घायल हुए हैं। भाजपा समर्थकों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से रैली स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तभी बिना किसी उकसावे के उन पर हमला कर दिया गया। प्रदर्शकारियों का दावा है कि उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उनके साथ गाली-गलौज की गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पत्थरबाजी के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री शशि पांजा के आवास को भी निशाना बनाया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। टीएमसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हिंसा की शुरुआत भाजपा समर्थकों ने की थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की ओर से पहले अभद्र टिप्पणी की गई और स्थानीय टीएमसी नेताओं के घरों पर पत्थर फेंके गए, जिसके जवाब में स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे। टीएमसी के मुताबिक, इस झड़प में उनके करीब 50 कार्यकर्ता चोटिल हुए हैं। घटना के बाद दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जो राज्य में बढ़ती चुनावी कड़वाहट को साफ दर्शाता है।
घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने लाठीचार्ज और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों गुटों को तितर-बितर किया और इलाके में शांति बहाल की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह रैली भाजपा की 'परिवर्तन यात्रा' के समापन का हिस्सा है, जहां वे 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देने वाले हैं। इस हिंसा ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।