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Gender Advocate Award: भारतीय सेना की मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित जेंडर एडवोकेट पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत यूएन में महिला सैन्य शांति सैनिकों 11वां सबसे बड़ा योगदान देने वाले देशों में से एक है।

Gender Advocate Award: भारतीय सेना की मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित जेंडर एडवोकेट पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने यह घोषणा की है। गुटेरेस ने बधाई देते हुए राधिका सेन को एक रोल मॉडल बताया। इसे संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

कांगो में की गई थी तैनाती
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मेजर राधिका सेन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ काम किया, जहां उन्होंने उत्तरी किवु में एक अलर्ट नेटवर्क बनाने में मदद की, जो समुदाय के लोगों, युवाओं और महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

UN Military Gender Advocate Award Radhika Sen
Major Radhika Sen

राधिका सेन ने बताया एंगेजमेंट प्लाटूर होने का मुख्य उद्देश्य
मेजर राधिका सेन ने बताया कि उनका एंगेजमेंट प्लाटूर होने का मुख्य उद्देश्य लोगों को कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करना था। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष वाले इलाके में महिलाएं एवं लड़कियां ही असमान रूप से प्रभावित होती हैं। मेजर सेन ने आगे कहा कि उनका और उनकी टीम का प्रयास उन महिलाओं और लड़कियों तक पहुंचना था। उनसे उनकी परेशानियों को लेकर बात करना और उन परेशानियों से उन्हें बाहर निकालना था। बता दें कि वर्तमान समय में भारत यूएन में महिला सैन्य शांति सैनिकों 11वां सबसे बड़ा योगदान देने वाले देशों में से एक है।

जानें कौन हैं राधिका सेन
सन 1993 में हिमाचल प्रदेश में जन्मी मेजर राधिका सेन आठ साल पहले यानी 2016 में सेना में शामिल हुई थीं। उन्होंने IIT बॉम्बे से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही थीं, जब उन्होंने सशस्त्र बलों में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने बायोटेक इंजीनियर में स्नातक की उपाधि प्राप्त की हैं। मेजर राधिका सेन ने मार्च 2023 से अप्रैल 2024 तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्व में MONUSCO की एंगेजमेंट प्लाटून की कमांडर के रूप में सेवा की। 

दूसरी भारतीय पीस कीपर बनी
मेजर राधिका सेन मेजर सुमन गवानी के बाद यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय पीस कीपर हैं। सुमन गवानी ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ काम किया था और 2019 में यह पुरस्कार प्राप्त किया था।

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