प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं के नाम पत्र लिखकर 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने का संकल्प दोहराया है।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की करोड़ों महिलाओं के नाम एक भावुक और ऐतिहासिक खुला पत्र लिखकर 2029 तक महिला आरक्षण को धरातल पर उतारने का अपना संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री ने इस पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया है कि भारत की बेटियां अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकतीं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' केवल एक कानून नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक पवित्र माध्यम है। पीएम ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि जब 2029 के चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न होंगे, तो सदन में गूंजने वाली महिलाओं की आवाज़ समावेशी विकास का नया अध्याय लिखेगी।

​दशकों पुराने गतिरोध को खत्म करने की अंतिम तैयारी 
​महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से भारतीय राजनीति के गलियारों में लंबित था। 2023 में जब इस अधिनियम को पारित किया गया, तब इसे जनगणना और परिसीमन के साथ जोड़ा गया था, जिससे इसके 2034 तक खिंचने की आशंका थी। हालांकि, विपक्ष की मांग और समय की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार अब इसे 2029 में ही लागू करने के लिए संविधान संशोधन की तैयारी कर चुकी है।

प्रधानमंत्री का यह पत्र इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो दिखाता है कि सरकार अब 'महिला विकास' से आगे बढ़कर 'महिला नेतृत्व वाले विकास' के मंत्र पर काम कर रही है।

​विशेष सत्र और 816 सीटों का नया गणित

सरकार ने 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य उन बाधाओं को दूर करना है जो 2029 में आरक्षण लागू करने के आड़े आ रही हैं। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 किया जा सकता है।

इस विस्तार के साथ ही 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। यह न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगा, बल्कि मौजूदा राजनैतिक संतुलन को भी नई दिशा देगा। सीटों का यह निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर करने की योजना है, ताकि प्रक्रिया में कोई देरी न हो।

विपक्ष का रुख 
​प्रधानमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि 2023 में जब बिल पारित हुआ, तब सभी दलों ने इसे 2029 तक लागू करने की इच्छा जताई थी। पीएम ने कहा, "विपक्ष ने 2029 की मांग की थी, और हम इसे पूरा कर रहे हैं।" हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने परिसीमन के तरीके और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए हैं।

इसके बावजूद, सरकार को विश्वास है कि यह ऐतिहासिक कदम सर्वसम्मति से आगे बढ़ेगा। पीएम ने सोशल मीडिया पर भी देश की बेटियों से आशीर्वाद मांगा और सांसदों से इस ऐतिहासिक सत्र में सकारात्मक भागीदारी की अपील की है।