Former Railway Minister Mukul Roy Passes Away: भारतीय राजनीति के माहिर खिलाड़ी और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय (Mukul Roy) का सोमवार तड़के निधन हो गया। 71 वर्षीय रॉय पिछले काफी समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। कोलकाता के एक निजी अस्पताल में तड़के 1:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पश्चिम बंगाल सहित देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार
मुकुल रॉय को कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद 'नंबर-2' की हैसियत हासिल थी। 1998 में जब TMC की स्थापना हुई, तब से लेकर 2011 में बंगाल से वामपंथ का किला ढहाने तक, मुकुल रॉय पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाते थे।
उनके प्रमुख पद:
रेल मंत्री: 2011 से 2012 के बीच केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
शिपिंग और शहरी विकास राज्य मंत्री: 2009 में यूपीए सरकार के दौरान इस पद पर रहे।
राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर जितना प्रभावशाली रहा, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी।
वर्ष 2017 में नारद स्टिंग कांड के आरोपों के बीच मुकुल रॉय को TMC से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थामा और 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। 2021 के बंगाल चुनाव में उन्होंने बीजेपी के लिए अहम भूमिका निभाई।
2021 चुनाव के नतीजों के बाद वे वापस टीएमसी में लौट आए, हालांकि खराब स्वास्थ्य के कारण वे पिछले कुछ समय से सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर थे।
रणनीति के माहिर खिलाड़ी थे मुकुल
मुकुल रॉय को जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की पहचान करने और चुनाव जीतने की सटीक रणनीति बनाने के लिए जाना जाता था। 2011 में जब बंगाल में परिवर्तन की लहर आई, तो पर्दे के पीछे से पूरी फील्डिंग मुकुल रॉय ने ही सजाई थी।
बीमारी से लंबी जंग
पिछले कुछ वर्षों से मुकुल रॉय का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। उनकी याददाश्त से जुड़ी समस्याओं और अन्य शारीरिक जटिलताओं के कारण उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक, उम्र और लंबी बीमारी के कारण उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।








