लोकसभा में सोमवार 9 मार्च को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। कांग्रेस और विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। इस मुद्दे पर आज सदन में चर्चा होने की संभावना है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया था कि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव 9 मार्च को लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
कैसे मंजूर होता है स्पीकर के खिलाफ नोटिस
लोकसभा के नियमों के मुताबिक, जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का नोटिस दिया जाता है तो उसे पहले स्वीकार किया जाता है। यदि सदन की कार्यवाही के दौरान चेयर की ओर से बुलाने पर कम से कम 50 सांसद अपने स्थान पर खड़े होकर इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं, तो नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है।
इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाती है और फिर मतदान होता है। लेकिन अगर 50 सदस्य समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाता।
सत्ता और विपक्ष दोनों ने जारी किया व्हिप
इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही सतर्क हो गए हैं। बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है कि जब यह मामला सदन में चर्चा के लिए आए, तब सभी सांसद मौजूद रहें। इससे साफ है कि संसद में आज इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज रह सकती है।
क्यों लाया जा रहा है प्रस्ताव
कांग्रेस के तीन सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि ने लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ यह नोटिस दिया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन में कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया।
इसके साथ ही विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि स्पीकर ने कुछ महिला सांसदों के खिलाफ आरोप लगाए और विपक्ष के कई सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया, जबकि उनका कहना है कि वे जनता से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे।
सत्ताधारी दल पर पक्षपात का आरोप
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि स्पीकर ने कई विवादित मामलों में सत्ताधारी दल का पक्ष लिया और ruling पार्टी के कुछ सदस्यों की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह का रवैया संसद की कार्यवाही और जनता के मुद्दों को उठाने की प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है।
चर्चा के दौरान स्पीकर नहीं कर सकते अध्यक्षता
संविधान के अनुसार, जिस समय स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, उस दौरान वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि उन्हें सदन में मौजूद रहने, अपना पक्ष रखने और प्रस्ताव पर मतदान करने का अधिकार होता है।
वोटिंग में ऐसे करेंगे मतदान
लोकसभा स्पीकर के पास सामान्य सांसदों की तरह डिवीजन नंबर नहीं होता। इसलिए यदि इस प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, तो ओम बिरला ऑटोमेटेड वोटिंग सिस्टम का उपयोग नहीं कर पाएंगे। उन्हें अपने वोट को दर्ज कराने के लिए पर्ची का इस्तेमाल करना होगा।
संख्या बल सरकार के पक्ष में
हालांकि संसद में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव को आसानी से गिरा सकती है। लोकसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।