नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते ईरान युद्ध के संकट ने अब भारतीय यात्रियों की जेब पर सीधा प्रहार करना शुरू कर दिया है। कुकिंग गैस की कीमतों में भारी उछाल के बाद अब हवाई यात्रा भी महंगी हो गई है।
बढ़ती तेल कीमतों के दबाव में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने टिकटों पर 'फ्यूल सरचार्ज' बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
इस निर्णय के बाद डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों तरह की उड़ानों के लिए यात्रियों को अब 400 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने होंगे।
जेट ईंधन (ATF) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी का असर
एविएशन सेक्टर पर बढ़ते इस वित्तीय बोझ का मुख्य कारण जेट ईंधन की कीमतों में आया भारी उछाल है।
ऑपरेशनल खर्च: एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले एटीएफ (ATF) पर ही खर्च होता है।
मार्च 2026 की शुरुआत: मार्च 2026 के पहले हफ्ते से ही एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिला है, जिससे एयरलाइन कंपनियों के लिए लागत संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अतिरिक्त टैक्स: दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में एटीएफ पर लगने वाले उच्च उत्पाद शुल्क और वैट (VAT) ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
किराये में बढ़ोत्तरी: डोमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट्स पर प्रभाव
एयर इंडिया ने नई फ्यूल सरचार्ज व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से तीन चरणों में लागू करने की घोषणा की है।
घरेलू और सार्क देश: भारत के डोमेस्टिक रूट्स और सार्क (SAARC) देशों के लिए फ्लाइट टिकट लगभग 399 रुपये तक महंगे हो जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें: पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के लिए उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज में क्रमशः 10 डॉलर, 20 डॉलर और 30 डॉलर तक की वृद्धि की गई है। यह बढ़ोत्तरी सभी उड़ानों पर लागू होगी और आने वाले समय में स्थितियां न सुधरने पर किराया और बढ़ सकता है।
तेल और गैस सप्लाई बाधित: कुकिंग गैस में भी भारी उछाल
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते समुद्री परिवहन मार्ग अवरुद्ध होने से भारत में ऊर्जा संकट गहरा गया है।
सप्लाई चैन: भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 50% तेल और गैस खाड़ी देशों से आयात करता है, जिसकी सप्लाई अब बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सिलेंडर के दाम: तेल कंपनियों ने डोमेस्टिक एलपीजी के दाम 60 रुपये और कमर्शियल एलपीजी के दाम 115 रुपये प्रति सिलेंडर तक बढ़ा दिए हैं।
सरकार का रुख: हालांकि सरकार ने आश्वस्त किया है कि सिलेंडरों की कमी नहीं है और रिफाइनरियों को कुकिंग गैस का प्रोडक्शन 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।