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मूड स्विंग होना ''बाइपोलर मूड डिसऑर्डर'' की निशानी तो नहीं

मूड स्विंग होना एक टाइम तक ठीक होता है।

मूड स्विंग होना बाइपोलर मूड डिसऑर्डर की निशानी तो नहीं
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इंसान के मूड का पता नहीं होता वो कभी इतना दुखी होता है कि डिप्रेशन में जाने लगता है। कभी इतना खुश जिसकी कोई सीमा नहीं होती।

मूड स्विंग होना एक टाइम तक ठीक होता है। अगर ये आगे बढ़ जाएं तो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है।

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अगर आपका कभी मूड अच्छा या कभी बहुत खराब रहता है तो इसे मेडिकल भाषा में 'बाइपोलर मूड डिसऑर्डर' कहते हैं। जानिए...

  • 1. इस बीमारी से दिमाग में उतार-चढ़ाव होने लगते हैं।
  • 2. सुबह ऊर्जा से भरे रहते हैं, लेकिन शाम होते-होते सारी खत्म हो जाती है। अचानक लोगों से बात करने में बोरियत महसूस होने लगती है।
  • 3. नए लोगों से मिलना अच्‍छा नहीं लगता और खुद अपने आप से नफरत करने लगते हैं।
  • 4. मन में ऐसे विचार आाना जो संभंव ही नहीं हो सकते।

मानव का मस्तिष्क न्यूरॉन से बना होता है। यह न्यूरॉन ही शरीर के अन्य भागों को काम करने के लिए सूचना भेजता है।

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परन्तु अत्यधिक ऊर्जा बढ़ जाने पर दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल बढ़ जाता है। इससे लोग दिमाग की बीमारी के शिकार होते हैं।

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