Examination Stress: जैसे-जैसे परीक्षा की तारीखें नज़दीक आती हैं, घरों में तनाव का माहौल बढ़ने लगता है। किताबों के ढेर, टाइम टेबल का दबाव और अच्छे नंबर लाने की उम्मीद इन सबके बीच बच्चे अक्सर चुपचाप घबराहट झेलते रहते हैं। कई बार यह तनाव उनके आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों पर असर डालता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि एग्ज़ाम स्ट्रेस आज के समय में आम समस्या बन चुकी है। लेकिन सही मार्गदर्शन, संतुलित दिनचर्या और भावनात्मक सहारे से बच्चों को आसानी से रिलैक्स कराया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ असरदार तरीके, जो बच्चों की घबराहट कम करने में मददगार हो सकते हैं।
परीक्षा में बच्चों को रिलैक्स रखने के टिप्स
पढ़ाई का रियलिस्टिक टाइम टेबल बनाएं
अक्सर बच्चे तब ज्यादा तनाव महसूस करते हैं जब सिलेबस अधूरा होता है या पढ़ाई बिखरी हुई होती है। ऐसे में एक संतुलित और व्यवहारिक टाइम टेबल बनाना जरूरी है। पढ़ाई के साथ छोटे-छोटे ब्रेक शामिल करें। 40-45 मिनट पढ़ाई के बाद 5-10 मिनट का ब्रेक दिमाग को तरोताजा रखता है।
तुलना करने से बचें
माता-पिता अनजाने में बच्चों की तुलना दूसरों से कर बैठते हैं, जिससे बच्चे का आत्मविश्वास कम हो सकता है। हर बच्चा अलग होता है और उसकी सीखने की क्षमता भी अलग होती है। बच्चों को उनकी मेहनत के लिए सराहें, न कि सिर्फ रिजल्ट के आधार पर।
खुलकर बातचीत करें
अगर बच्चा चिड़चिड़ा हो रहा है या बार-बार चिंता जता रहा है, तो उससे खुलकर बात करें। उसकी बात बिना टोके सुनें। कई बार सिर्फ अपनी बात कह पाने से ही बच्चे का तनाव आधा कम हो जाता है। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि नंबर से ज्यादा उनकी सेहत और खुशहाली मायने रखती है।
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पर्याप्त नींद और सही खानपान
परीक्षा के दौरान देर रात तक जागना आम हो जाता है, लेकिन नींद की कमी तनाव को बढ़ा सकती है। बच्चों को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेने के लिए प्रेरित करें। साथ ही हल्का, पौष्टिक और संतुलित भोजन दें। फल, सूखे मेवे और पर्याप्त पानी दिमाग को सक्रिय रखते हैं।
रिलैक्सेशन तकनीक सिखाएं
गहरी सांस लेना (डीप ब्रीदिंग), हल्का योग या 10-15 मिनट का ध्यान बच्चों को मानसिक रूप से शांत करता है। सुबह या पढ़ाई के बीच में 5 मिनट की श्वास-प्रश्वास की एक्सरसाइज घबराहट कम करने में मददगार हो सकती है।
परिणाम से ज्यादा प्रयास पर ध्यान
बच्चों को यह समझाएं कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं। असफलता भी सीखने का मौका देती है। जब बच्चे परिणाम के बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान देते हैं, तो उनका डर अपने आप कम हो जाता है।
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(लेखक:कीर्ति)