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फिल्ममेकर रोहित शेट्टी अपनी सुपरहिट फिल्मों से बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना कर चुके हैं। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे रोहित को शुरुआती दिनों में बहुत संघर्ष देखने को मिला। हाल ही में रोहित शेट्टी ने अपने पुराने दिनों को याद कर कई खुलासे किए हैं।

Filmmaker Rohit Shetty: फिल्ममेकर रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) 'गोलमाल' और 'सिंघम' फ्रैंचाइज़ी जैसी सुपरहिट फिल्मों से बॉलीवुड में अपना अलग मुकाम हासिल कर चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे रोहित शेट्टी को बहुत संघर्ष करना पड़ा था। रोहित का बचपन भी गरीबी में गुज़रा था। हाल ही में डायरेक्टर ने अपने पुराने दिनों को याद कर बताया कि उनके पिता की मौत के बाद उनके जीवन में कितना संघर्ष था। 

इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने कम उम्र में चुनौतियों का सामना किया और अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कड़ी मेहनत की। रोहित ने यह भी खुलासा किया कि कैसे मुंबई शहर ने उन्हें बहुत सी चीजें सिखाईं और बताया कि इस सपनों के शहर में काम पाने के लिए लोगों की कड़ी मेहनत करने की भावना कितनी अलग है।

'पिता की मौत के बाद पैसे नहीं होते थे'
कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के साथ बातचीत में, रोहित ने बताया कि वह सैंटाक्रूज़ में अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए सुबह 5:45 बजे की लोकल ट्रेन पकड़ते थे। रोहित ने कहा, "जब हम सैंटाक्रूज़ में रहते थे... तब मेरे पिताजी का निधन हो गया था और मां के पास बचत के पैसे भी खत्म हो गए थे... और इसलिए हम अपनी दादी के घर दहिसर रहने चले गए।

रोहित ने आगे कहा, "मुझे कभी महसूस नहीं हुआ कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। परिवार ने मिलकर हमेशा संघर्ष किया और कड़ी मेहनत की। मैं मुंबई में पैदा हुआ था और स्ट्रीट का लड़का था...इसलिए मुझे ये सारी चीजें बहुत कम उम्र में ही सीखने को मिल गई थीं।"

'मुंबई शहर में लोग कड़ी मेहनत करते हैं'
बातचीत में रोहित ने बताया कि मुंबई शहर में काम पाने को लिए लोग कितनी मेहनत करते हैं। मुंबई शहर के लोगों में काम के प्रति अलग जज़्बा है और यहां ऑटो ड्राइवर से लेकर सड़क पर पोहा बेचने वाले तक, हर कोई काम के लिए कड़ी मेहनत करता है।

रोहित ने आगे कहा, "मैं यहीं (मुंबई में) पैदा हुआ और पला-बढ़ा हूं। एक चीज़ जो आज तक नहीं बदली है... वह है मुंबई के लोगों की भावना। यह कुछ अलग है। जब भी मैं मुंबई आता हूं, तो मुझे यहां काम करने की और चाहत बढ़ने लगती है। आप यहां आकर कितना भी आराम करने का सोचें, लेकिन यहां आप एक दिन से ज्यादा खाली नहीं बैठ सकते और यही कारण है कि यह शहर बहुत प्रोग्रेसिव है।"

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