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आईआईएम संस्थानों में भी लागू होगा फैकेल्टी में आरक्षण

मंत्रालय ने सभी 20 संस्थानों को अनिवार्य अनुपालना का पत्र जारी किया है। 20 आईआईएम संस्थानों में आईआईएम रोहतक, रायपुर और इंदौर भी शामिल हैं।

आईआईएम संस्थानों में भी लागू होगा फैकेल्टी में आरक्षणफैकेल्टी आरक्षण

प्रबंधन के क्षेत्र में देश के शीर्षस्थ संस्थानों में शुमार आईआईएम में भी जल्द ही फैकेल्टी में शत-प्रतिशत आरक्षण लागू हो जाएगा। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने सभी 20 आईआईएम को एक पत्र जारी कर दिया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हरिभूमि को बताया कि बीते करीब चार दशक से अधिक वक्त से उच्च-शिक्षा से जुड़े आईआईएम संस्थानों में फैकेल्टी में आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं की गई थी।

इसके लिए सबसे पहले देश में करीब वर्ष 1975 के आसपास आरक्षण कानून बनने और उसे लागू कराते वक्त तत्कालीन से लेकर आज की मौजूदा सरकारों ने भी आईआईएम को कभी इसे अनिवार्य रुप से लागू करने का निर्देश नहीं दिया। जबकि इसके विपरीत उच्च-शिक्षा के बाकी संस्थानों में जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में फैकेल्टी में आरक्षण लागू था।

आईआईटी भी इस सूची में शामिल है। लेकिन वहां इसके क्रियान्वयन की रफ्तार बेहद धीमी रही है। उधर मंगलवार को फैकेल्टी में आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर संसद की स्थायी समिति की एक अहम बैठक भी होने वाली है। जिसमें मंत्रालय को इसके क्रियान्वयन को लेकर अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है।

गौरतलब है कि हरिभूमि ने बीते 27 अक्टूबर को 'शिक्षण संस्थानों में आरक्षण नीति के धीमे क्रियान्वयन को लेकर संसदीय समिति खफा' शीर्षक से एक खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 20 आईआईएम संस्थानों में आईआईएम रोहतक, रायपुर और इंदौर भी शामिल हैं।


पुराने सभी आदेश रद्द

एमएचआरडी ने अपने पत्र में आईआईएम को यह साफ कह दिया है कि इस पत्र के बाद अब उनके मन में आरक्षण को लेकर कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए। क्योंकि मंत्रालय ने इस नए पत्र के माध्यम से उसके द्वारा जारी किए गए सभी पुराने पत्राचार और वार्तालाप को रद्द कर दिया है। अब केवल फैकेल्टी में आरक्षण लागू करने का वर्तमान में जारी यह पत्र व्यवहार ही लागू माना जाएगा।

गौरतलब है कि एमएचआरडी की ओर से न केवल वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के दौर में आईआईएम को आरक्षण लागू न करने से छूट दी गई थी। बल्कि 2010 के बाद भी कई मौकों पर मंत्रालय ने इन संस्थानों को अपने पत्राचार के माध्यम से फैकेल्टी में आरक्षण लागू करने की केवल उम्मीद मात्र जताई थी। कभी भी उसकी अनिवार्य अनुपालना पर जोर नहीं दिया गया।


संसदीय समिति को देनी है रिपोर्ट

अधिकारी ने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के मसले की देखरेख कर रही संसद की स्थायी समिति इस मामले पर बीते कुछ वक्त से कड़ी निगरानी रख रही है। बीते अक्टूबर महीने में भी उसने अपनी एक बैठक में उच्च-शिक्षण संस्थानों में फैकेल्टी में आरक्षण के धीमे क्रियान्वयन और आईआईएम में इसके अब तक लागू हो पाने को लेकर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए मुद्दे पर 90 दिनों के भीतर अपना रुख साफ करने को कहा था।

ऐसे में दशकों से इस मामले को लगभग मौन बैठे हुए मंत्रालय में अचानक सक्रियता बढ़ गई है। शिक्षण संस्थानों में उच्च के अलावा स्कूली शिक्षा के संस्थानों में भी फैकेल्टी में आरक्षण लागू होने की प्रक्रिया की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।

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