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छत्तीसगढ़: ग्रंथपाल भर्ती में विवाद, सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, जानें पूरा मामला

सहायक शिक्षक (पंचायत) को ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नति देने के राज्य शासन के आदेश का विरोध शुरू हो गया है।

छत्तीसगढ़:  ग्रंथपाल भर्ती में विवाद, सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, जानें पूरा मामला

सहायक शिक्षक (पंचायत) को ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नति देने के राज्य शासन के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेशभर के हजारों बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस डिग्रीधारकों ने इसे साजिश बताते हुए इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है।

इनका कहना है कि लाइब्रेरी साइंस की डिग्रीधारकों का अस्तित्व बनने से पहले ही समाप्त होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है। लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई करके एमलिब, एमफिल जैसी उच्च शिक्षा हासिल करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के सामने उनके भविष्य पर सवालिया निशान छत्तीसगढ़ शासन ने एक आदेश जारी करते हुए लगा दिया है।

गौरतलब है कि सहायक शिक्षक (पंचायत) को ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नति देने का आदेश राज्य शासन ने जारी किया है। पदोन्नति के बाद ये ग्रंथपाल वर्ग दो के समकक्ष हो जाएंगे।

उन शिक्षाकर्मियों को वर्ग-2 की तरह ही वेतन भत्तों का लाभ मिलेगा। हालांकि इसमें वही पात्र होंगे, जिनकी सेवा सात साल पूरी हो चुकी है। शासन के आदेश में कहा गया है कि वैसे शिक्षाकर्मी जिन्होंने बी.लिब की डिग्री ले रखी है और पदोन्नति की अर्हता हासिल कर ली है, उन्हें पदोन्नति दी जाएगी।

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प्रदेश के स्कूलों में करीब 4000 पद हैं खाली

प्रदेश के स्कूलों में ग्रंथपाल के करीब 4 हजार से अधिक पद खाली पड़े हुए हैं। यह ऐसे पात्र शिक्षाकर्मियों के लिए बेहतर अवसर होगा। पदोन्नति के लिए लिए शिक्षाकर्मियों की शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में डिग्री या स्नातक अथवा मान्यता प्राप्त संस्था से लाइब्रेरी साइंस में एक वर्षीय डिप्लोमा और शैक्षणिक अर्हता के साथ 7 साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षाकर्मी ही पदोन्नत हो पाएंगे।

डिग्रीधारियों का विरोध, करेंगे प्रदेशव्यापी आंदोलन

शासन के इस आदेश का प्रदेशभर में बीलिब डिग्रीधारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। स्थानीय कोन्हेर गार्डन में रविवार को बड़ी संख्या में शहर व आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में बीलिब,एमलिब डिग्रीधारी एकजुट हुए।

छत्तीसगढ़ पुस्तकालय विज्ञान उपाधिधारक संघ के बैनर तले इकट्ठे हुए डिग्रीधारियों ने कहा कि इस आदेश से आने वाले दिनों में नियमित भर्ती प्रक्रिया की बांट जोह रहे हजारों डिग्रीधारियों के सपनों पर पानी फिर गया है।

इसे पूरी तरह असंवैधानिक है बताते हुए पुरजोर विरोध की बात कही गई। करते हैं। इसके लिए प्रदेश भर में सचिव,कलेक्टर के माध्यम में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने और प्रदर्शन करना तय किया गया।

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5 साल से नहीं हुई कोइ भर्ती

लाइब्रेरी साइंस के विषय विशेषज्ञ के तौर पर उपस्थित रहे गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के ग्रंथालय विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.ब्रजेश तिवारी ने कहा कि इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। यह विद्यार्थियों के हित में नहीं हैं।

बैठक में इस बात पर भी आक्रोश जाहिर किया गया कि प्रदेश में ग्रंथपाल की पिछले पांच सालों से कोई नियमित भर्ती नहीं निकल रही है। 2013 में निकली ग्रंथपाल की भर्तियों पर भी रोक लगा दी गई।

ऐसे में युवा भटक रहें हैं। बैठक में सालिक राम, सतीश, शिवकोरी,मंजुला जैन, बिरजू टंडन, सत्यवतीकौशिक शिमला, शिवकुमारी, रंजीत, प्रमोद, घनश्याम, नेहा, रूकमणी, रशनी, शंकर, अमरदास, अश्वनी,रूपेश, महेश,देवेंद्र, विजय, धीरज, विकास, गजानंद, मिथुन, विपिन सहित बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े लोग उपस्थित थे।

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