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Citrini Research report: एक नई रिसर्च रिपोर्ट ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। रिपोर्ट में एआई के कारण बड़े पैमाने पर नौकरी जाने और आईटी सेक्टर पर असर की बात कही गई है।

Citrini Research report: दुनिया भर के शेयर बाजारों में इन दिनों एक रिपोर्ट को लेकर काफी चर्चा हो रही। यह रिपोर्ट सिट्रिनी रिसर्च नाम की एक संस्था ने जारी की है। रिपोर्ट का नाम है '2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस'। इसमें बताया गया है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव हो सकते।

रिपोर्ट सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई। अमेरिका में आईबीएम के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई और कंपनी को करीब 25 साल का सबसे खराब कारोबार वाला दिन झेलना पड़ा। भारत में भी आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों जैसे विप्रो, इंफोसिस, टीसीएस के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली है। 

सिट्रिनी रिसर्च कौन है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह एक छोटी रिसर्च संस्था है, जिसकी शुरुआत साल 2023 में हुई थी। इसे जेम्स वैन गिलन ने शुरू किया था। उन्होंने अपनी हेल्थकेयर कंपनी बेचने के बाद शेयर बाजार और नई तकनीक पर अध्ययन लिखना शुरू किया। इस रिपोर्ट को अलाप शाह ने भी मिलकर तैयार किया है।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह भविष्य की पक्की भविष्यवाणी नहीं है। यह सिर्फ एक संभावना बताती है कि अगर एआई बहुत तेजी से बढ़ती रही तो दुनिया की आर्थिक स्थिति कैसी हो सकती है।

भारत को लेकर क्या कहा गया
रिपोर्ट में भारत के बारे में भी कुछ चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और सरकार को आईएमएफ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बातचीत करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट का कहना है कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र कम लागत के कारण दुनिया में मजबूत रहा है। लेकिन अगर एआई तेजी से काम करने लगी तो कंपनियों की जरूरत कम हो सकती है और कई अनुबंध खत्म हो सकते हैं। इससे इस क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

नौकरियों पर असर की आशंका
इस रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता नौकरियों को लेकर जताई गई है। इसमें कहा गया है कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है, खासकर दफ्तरों में काम करने वाले लोगों की। कई काम ऐसे हैं जिन्हें एआई करने लगेगी। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि नई तरह की नौकरियां भी बनेंगी। जैसे एआई से जुड़े विशेषज्ञ, सुरक्षा पर काम करने वाले लोग और तकनीकी व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी। लेकिन इन नौकरियों की संख्या कम हो सकती है और वेतन भी पहले से कम हो सकता है।

रिपोर्ट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारों को एआई से होने वाली अतिरिक्त कमाई पर कर लगाने पर विचार करना चाहिए। इससे बेरोजगारी से निपटने और नई नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि कई अर्थशास्त्री इस रिपोर्ट से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि इसमें जो हालात बताए गए हैं वे काफी ज्यादा नकारात्मक हैं। असल दुनिया में सरकारें, नीतियां और बाजार मिलकर स्थिति को संभाल सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि इस रिपोर्ट ने दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

(प्रियंका कुमारी)

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