Nifty IT index Crash: भारतीय आईटी शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। निवेशकों में एआई को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया। दोपहर तक आईटी सेक्टर का प्रमुख सूचकांक निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया था और यह दिन का सबसे कमजोर सेक्टर बन गया। बाजार बंद होते-होते इसमें कुछ रिकवरी हुई लेकिन, गिरावट 5 फीसदी के आसपास ही रही।
गिरावट की बड़ी वजह एआई कंपनी एंथ्रॉपिक का दावा माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि उसके क्लॉड कोड जैसे टूल पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को आधुनिक बनाने की लागत और जटिलता को काफी कम कर सकते। यही काम भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा रहा है। ऐसे में निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में कारोबार का ढांचा बदल सकता।
आईटी इंडेक्स 21 फीसदी तक गिर चुका
बाजार में इसका सीधा असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टेक महिंद्रा का शेयर करीब 6.7 प्रतिशत गिरकर लगभग 1344 रुपये पर पहुंच गया। वहीं एचसीएल टेक्नोलॉजी के शेयर में करीब 7 फीसदी की गिरावट आई।
इंफोसिस-टीसीएस के शेयरों में बिकवाली
देश की दिग्गज आईटी कंपनियां भी दबाव में रहीं। इंफोसिस का शेयर लगभग 4.6 प्रतिशत टूटे जबकि टीसीएस करीब 4 प्रतिशत नीचे आ गया। इसके अलावा विप्रो के शेयर में भी गिरावट दर्ज हुई। आईटी इंडेक्स से बाहर की कंपनी एलटीआईमाइंडट्री भी करीब 6 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गई।
आईटी शेयरों में यह गिरावट कोई एक दिन की नहीं है। पिछले पांच कारोबारी सेशन से लगातार बिकवाली जारी है। आंकड़ों के मुताबिक आईटी इंडेक्स एक हफ्ते में करीब 9 प्रतिशत और एक महीने में 21 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने भी सेक्टर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसने कई आईटी कंपनियों की रेटिंग घटा दी और लक्ष्य कीमतों में 26 से 31 प्रतिशत तक कटौती की। ब्रोकरेज का कहना है कि एआई के कारण आईटी कंपनियों का पारंपरिक सर्विस मॉडल बदल सकता और कमाई पर दबाव आ सकता है।
हालांकि दूसरी तरफ CLSA ने थोड़ा संतुलित नजरिया रखा है। उसके मुताबिक फिलहाल ग्राहकों के खर्च या प्रोजेक्ट्स में बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा। एआई को अभी कंपनियां पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं बल्कि काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
कुल मिलाकर एआई को लेकर बढ़ती चर्चा ने आईटी सेक्टर में अस्थिरता बढ़ा दी है। निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले वर्षों में तकनीक इस उद्योग को किस दिशा में ले जाएगी।
(प्रियंका कुमारी)









