mutual fund investors: बाजार में उतार-चढ़ाव निवेशकों की असली परीक्षा लेता है। खासकर म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए ऐसे दौर में धैर्य और अनुशासन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल सैम्यूलशन ने एक बार कहा था कि निवेश ऐसा होना चाहिए जैसे आप पेंट सूखते या घास उगते हुए देख रहे हों। अगर रोमांच चाहिए तो 800 डॉलर लेकर लास वेगास चले जाइए।
आज के दौर में वैश्विक अनिश्चितताएं, जैसे मध्य पूर्व में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन, बाजार को अचानक हिलाकर रख देते हैं। ऐसे में कई निवेशक घबरा जाते और जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की अस्थिरता के समय की गई गलतियां लंबे समय में निवेशकों के रिटर्न को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशक घबरा जाते
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आम निवेशक अक्सर रोज आने वाली बाजार की खबरों से प्रभावित हो जाते हैं। लगातार आती सुर्खियां और बाजार की हलचल उन्हें चिंतित कर देती है। लेकिन हर उतार-चढ़ाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देना निवेश की पूरी रणनीति को कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे आम गलती होती है बाजार गिरने पर घबराकर निवेश बेच देना। जब पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरती दिखती है तो कई निवेशक नुकसान से बचने के लिए अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स रिडीम कर लेते हैं।
बाजार में गिरावट की स्थिति में एसआईपी बंद करना गलत
इस तरह की घबराहट निवेशकों को बाजार की वापसी का फायदा लेने से रोक देती है। इतिहास बताता है कि इक्विटी बाजार समय के साथ फिर से उभरते हैं और धैर्य रखने वालों को अच्छा रिटर्न देते हैं।
दूसरी बड़ी गलती है बार-बार फंड बदलना। बाजार में हलचल होते ही कई निवेशक बेहतर रिटर्न की उम्मीद में अलग-अलग फंड या सेक्टर में पैसा शिफ्ट करने लगते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को अपनी तय की गई एसेट एलोकेशन रणनीति से नहीं भटकना चाहिए। अगर किसी निवेशक ने अपने पोर्टफोलियो में 70 प्रतिशत इक्विटी और 30 प्रतिशत डेट का संतुलन तय किया है, तो उसे उसी अनुपात को बनाए रखना चाहिए।
तीसरी बड़ी गलती है एसआईपी बंद कर देना। जब बाजार गिरता है तो कई लोग अपनी सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी रोक देते हैं। जबकि असल में बाजार गिरने के दौरान निवेशकों को कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जिससे लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है।
कई निवेशक बाजार को समय करने की कोशिश भी करते हैं। वे सोचते हैं कि अभी बाजार गिरेगा, इसलिए पैसा निकालकर बाद में कम दाम पर फिर निवेश करेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि बाजार का सही समय पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। अक्सर लोग कम दाम पर बेच देते हैं और फिर ऊंचे दाम पर खरीद लेते हैं।
इसके अलावा कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित करना भी भूल जाते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से इक्विटी और डेट का संतुलन बिगड़ सकता है, इसलिए समय-समय पर रीबैलेंस करना जरूरी होता है।
एक और आम समस्या यह है कि कई निवेशक खुद को डाइवर्सिफाइड समझते हैं, लेकिन उनका पैसा कुछ ही सेक्टर या निवेश स्टाइल में केंद्रित होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इक्विटी पोर्टफोलियो को अलग-अलग निवेश शैलियों, सेक्टर और क्षेत्रों में फैलाकर रखना चाहिए ताकि जोखिम कम हो सके।
(प्रियंका कुमारी)









