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Term vs traditional insurance: टर्म प्लान कम प्रीमियम में ज्यादा कवर देता है लेकिन रिटर्न नहीं। ट्रेडिशनल प्लान सुरक्षा के साथ बचत और मैच्योरिटी बेनिफिट देता है। चुनाव आपके फाइनेंशियल गोल और बजट पर निर्भर करता है।

Term vs traditional insurance: जब भी कोई लाइफ इंश्योरेंस लेने का फैसला करता है, सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि टर्म प्लान लें या ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस? दोनों का मकसद परिवार की आर्थिक सुरक्षा है लेकिन दोनों की बनावट और फायदा अलग-अलग। असली फर्क इस बात पर टिका है कि आपको सिर्फ रिस्क कवर चाहिए या रिस्क कवर के साथ बचत भी।

टर्म लाइफ इंश्योरेंस क्या है?
टर्म इंश्योरेंस सबसे आसान और सीधा प्लान है। यह एक तय समय, जैसे 20, 30 या 40 साल के लिए सुरक्षा देता है। अगर पॉलिसी अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को सम एश्योर्ड मिल जाता है। लेकिन अगर पॉलिसीधारक अवधि पूरी होने तक जीवित रहता है, तो आम तौर पर कोई रकम नहीं मिलती। हां, 'रिटर्न ऑफ प्रीमियम' वाले विकल्प में प्रीमियम वापस मिल सकता है।

चूंकि टर्म प्लान में बचत या निवेश का हिस्सा नहीं होता, इसलिए इसका प्रीमियम काफी कम होता है। कम प्रीमियम में ज्यादा कवर मिलना इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यही वजह है कि युवा कमाई शुरू करने वाले लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं।

ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस क्या है?
ट्रेडिशनल प्लान, जैसे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी, सुरक्षा के साथ बचत भी देते हैं। इसमें डेथ बेनिफिट के साथ-साथ मैच्योरिटी बेनिफिट भी मिलता है, अगर पॉलिसीधारक पॉलिसी अवधि तक जिंदा रहता है। कुछ योजनाएं कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर बोनस भी देती हैं। ऐसे प्लान उन लोगों को पसंद आते हैं जो इंश्योरेंस के साथ अनुशासित बचत चाहते हैं। हालांकि, इनका प्रीमियम ज्यादा होता है, क्योंकि रकम का एक हिस्सा बचत या निवेश में जाता है।

खर्च और कवर में बड़ा फर्क
टर्म प्लान में कम प्रीमियम में बड़ा कवर मिलता है। वहीं ट्रेडिशनल प्लान में उतने ही प्रीमियम में कवर कम होता है क्योंकि उसमें बचत भी शामिल रहती है। अगर प्राथमिकता परिवार को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा देने की है, तो टर्म प्लान ज्यादा असरदार है। लेकिन अगर गारंटीड रिटर्न और सेविंग्स भी जरूरी हैं, तो ट्रेडिशनल प्लान सही हो सकता है।

रिटर्न और फ्लेक्सिबिलिटी
टर्म प्लान में रिटर्न नहीं मिलता, जब तक अतिरिक्त विकल्प न लिया जाए। ट्रेडिशनल प्लान में मैच्योरिटी राशि और कभी-कभी बोनस भी मिलता है, हालांकि रिटर्न बाजार से जुड़ा नहीं होता। टर्म प्लान समझने में आसान हैं, जबकि ट्रेडिशनल पॉलिसी की शर्तें और सरेंडर नियम थोड़े जटिल हो सकते हैं।

क्या दोनों साथ ले सकते हैं?
हां, कई लोग सुरक्षा के लिए टर्म प्लान लेते हैं और बचत के लिए अलग निवेश साधन चुनते हैं। आखिर में फैसला आपकी जरूरत, बजट और फाइनेंशियल गोल पर निर्भर करता है। पहले लक्ष्य तय करें, फिर प्लान चुनें।
(प्रियंका कुमारी)

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