भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 1470 अंक टूटकर 74,563 पर और निफ्टी 23,150 के नीचे बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेत बाजार पर भारी पड़े।

मुंबई। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के आखिरी दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50 दोनों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में यह कमजोरी मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के कारण देखी गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,579 अंक तक नीचे चला गया और अंत में 1,470 अंकों की गिरावट के साथ 74,563 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी करीब 488 अंक टूटकर लगभग 23,151 पर बंद हुआ।

निफ्टी और सेंसेक्स  दो 5 फीसदी से अधिक टूटे 
पूरे सप्ताह की बात करें तो बाजार में गिरावट और भी ज्यादा रही। निफ्टी इस सप्ताह करीब 5.3 प्रतिशत तक फिसल गया, जो जून 2022 के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। इसी तरह सेंसेक्स में भी लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मई 2020 के बाद का सबसे खराब प्रदर्शन है। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील, स्टेट बैंक, भारत इलेक्ट्रानिक्स, मारुति सुजुकी और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे प्रमुख शेयरों में 7 प्रतिशत तक गिरावट आई। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों ने इस गिरावट के बीच बढ़त भी दिखाई, जिनमें हिंदुस्तान यूनीलीवर और भारती एयरटेल प्रमुख हैं।  

बीएसई सेंसेक्स के 30 में 28 शेयर गिरावट में बंद हुए।

आटो सेक्टर में दिखी सबसे अधिक गिरावट 
सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार के कारोबार में सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। ऑटो कंपनियों के शेयरों में लगभग 10.6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई, जो पिछले छह वर्षों में सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है। निवेशकों को डर है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर उत्पादन और निर्यात पर पड़ सकता है। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी लगभग 5.7 प्रतिशत तक गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसे निकालना बताया जा रहा है।

दबाव के बीच कुछ कंपनियों का अच्छा प्रदर्शन
हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखी गई। उदाहरण के तौर पर कोल इंडिया के शेयर लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ गए। माना जा रहा है कि शुरुआती गर्मी के कारण कोयले की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे इस कंपनी के शेयरों को समर्थन मिला। बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड क्रूड  की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर स्ट्रेट आफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। 

एनएसई का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी भी गिरावट में बंद हुआ।

वैश्विक बाजारों में भी देखने को मिली गिरावट
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी देखी गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा। एशियाई बाजारों में कोस्पी, निक्केई 225, एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और हैंग सेंग इंडेक्स जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। वहीं अमेरिका में भी डाउजोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज , एसएंडपी 500 और नास्डैक कंपोजिट में तेज गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।