nifty it index down: कमजोर तिमाही नतीजों के चलते आईटी सेक्टर के शेयरों में बुधवार को भारी गिरावट देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब पांच प्रतिशत गिरकर 30159.45 पर आ गया, जिससे पूरे क्षेत्र में दबाव साफ नजर आया।
सबसे ज्यादा गिरावट एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर में दर्ज की गई, जो करीब 11 प्रतिशत टूटकर 1283 रुपये पर आ गया। कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजे बाज़ार की उम्मीदों से कमजोर रहे। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 4 फीसदी बढ़कर 4488 करोड़ रुपये रहा जबकि विश्लेषकों को इससे अधिक लाभ की उम्मीद थी। इसी तरह कंपनी की कुल आय 12.3 प्रतिशत बढ़कर 33981 करोड़ रुपये रही, लेकिन खर्च और वैश्विक परिस्थितियों के कारण प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स को भी नुकसान
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर भी करीब 5 फीसदी गिर गए। कंपनी के तिमाही नतीजे कई प्रमुख मानकों पर अनुमान से कमजोर रहे। कंपनी की आय में स्थिर मुद्रा के आधार पर 3.4 प्रतिशत की बढ़त हुई, जो अनुमान से थोड़ी कम है। इसके अलावा प्रॉफिट मार्जिन भी उम्मीद से नीचे रहा। कुल सौदों की संख्या में भी गिरावट देखी गई, जो निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी।
टेक महिंद्रा के शेयर 6 फीसदी टूटे
टेक महिंद्रा के शेयर भी 6 प्रतिशत से ज्यादा टूटे। कंपनी के नतीजे घोषित होने से पहले ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। अनुमान है कि कंपनी की आय में मामूली बढ़त और लाभ मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन समग्र वृद्धि सीमित रह सकती है।
अन्य प्रमुख कंपनियों में कोफोर्ज के शेयर लगभग 6 प्रतिशत और एलटीआईमाइंडट्री के शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर भी करीब चार प्रतिशत नीचे आए। एमफेसिस और विप्रो के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि विप्रो में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस के शेयर भी चार प्रतिशत से ज्यादा टूटे। कंपनी के नतीजे गुरुवार को आने वाले हैं, जिसमें लाभ में सालाना आधार पर लगभग चार प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, लेकिन तिमाही आधार पर हल्की गिरावट संभव है। आय में भी सालाना आधार पर अच्छी बढ़त की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस गिरावट के बीच ओरेकल वित्तीय सेवाओं के शेयर में हल्की बढ़त देखी गई, जो पूरे क्षेत्र में एकमात्र सकारात्मक संकेत रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और तकनीकी खर्च में कमी के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है।
(प्रियंका कुमारी)