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closing bell: सेंसेक्स-निफ्टी में 2% से ज्यादा गिरावट, बाजार में भारी बिकवाली। कच्चा तेल, ईरान तनाव और वैश्विक कमजोरी बनी बड़ी वजह बनी। रुपये में गिरावट और VIX बढ़ने से बढ़ी बाजार की चिंता।

Closing bell: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार (27 मार्च) को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ईरान युद्ध को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के चलते बाजार में बिकवाली हावी रही। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

दोपहर 3 बजे के आसपास सेंसेक्स 1600 अंक यानी 2.16% टूटकर 73647 के स्तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 467 अंक गिरकर 22839 पर आ गया और 22900 का अहम स्तर भी टूट गया। बाजार में चौतरफा कमजोरी रही। करीब 700 शेयरों में तेजी रही जबकि 3315 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

गिरावट की बड़ी वजहें क्या रहीं
मुनाफावसूली का दबाव: पिछले दो सत्रों में बाजार में करीब 3.5% की तेज तेजी आई थी। ऐसे में निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। 16 में से 15 सेक्टर लाल निशान में रहे, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1.7% टूट गए।

वैश्विक बाजारों में कमजोरी: अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर भी पड़ा। वॉल स्ट्रीट में 2% तक की गिरावट आई, जबकि एशियाई बाजार भी दबाव में रहे।

ईरान युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है। इससे निवेशकों में डर बना हुआ है और वे जोखिम लेने से बच रहे हैं।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। इससे भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव बढ़ता है, जिसका असर बाजार पर साफ दिख रहा है।

रुपये में कमजोरी और विदेशी बिकवाली: रुपया गिरकर 94.7 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है।

बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। PSU बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा टूटा, जहां यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक करीब 3% तक गिर गए। टाटा मोटर्स, बजाज फाइनेंस, एसबीआई, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ जैसे बड़े शेयरों में 1-3% की गिरावट रही। हालांकि, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन करीब 4.7% चढ़कर टॉप गेनर रहा।

बाजार में बढ़ी घबराहट
इंडिया VIX, जो बाजार की अस्थिरता का पैमाना है, 7.5% बढ़कर 26.53 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा अब काफी हद तक ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

(प्रियंका कुमारी)

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