Custom Rules: विदेश से भारत लौटते समय सोना, ज्वेलरी या महंगे गैजेट्स साथ लाने को लेकर यात्रियों में अक्सर भ्रम बना रहता है। कई लोग डरते हैं कि कहीं एयरपोर्ट पर परेशानी न हो जाए। दरअसल, ज्यादातर मामलों में समस्या सामान लाने पर नहीं, बल्कि नियमों की सही जानकारी न होने और डिक्लेरेशन न करने पर होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रोजमर्रा के इस्तेमाल की ज्वेलरी पर आमतौर पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। अगर वह सामान्य मात्रा में पहनी हुई हो। जैसे कुछ सोने के गहने, शादी का सेट या नियमित उपयोग के आभूषण। लेकिन अगर ज्वेलरी ज्यादा मात्रा में हो या पैक करके लाई जा रही हो, तो कस्टम अधिकारियों को शक हो सकता कि यह व्यक्तिगत उपयोग के बजाय व्यापार या निवेश के लिए लाई जा रही। ऐसे मामलों में पूछताछ हो सकती।
महंगे गहने का रिकॉर्ड जरूरी है
महंगे गहनों के साथ यात्रा करते समय उनकी खरीद की रसीद या पहले से मालिकाना हक का कोई प्रमाण साथ रखना फायदेमंद हो सकता है। इससे जरूरत पड़ने पर आप आसानी से अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
सोने की ईंट को लेकर नियम ज्यादा सख्त
सोने की ईंट (गोल्ड बार) या सिक्कों के मामले में नियम ज्यादा सख्त हैं। इन्हें बुलियन माना जाता है और इन पर कस्टम ड्यूटी लागू होती। साथ ही, इन्हें लाने के लिए कुछ शर्तें भी होती हैं, जैसे विदेश में रहने की अवधि और व्यक्ति की रेजिडेंसी स्थिति।
विदेश से बिना घोषणा के गोल्ड बार लाए तो फंस सकते
अगर कोई यात्री बिना डिक्लेयर किए बड़ी मात्रा में गोल्ड बार या सिक्के लाता है, तो सामान जब्त हो सकता है और जुर्माना भी लग सकता है। कई मामलों में एयरपोर्ट पर ही ड्यूटी भरनी पड़ती है।
इलेक्ट्रॉनिक आयटम को लेकर भी सावधानी जरूरी
इलेक्ट्रॉनिक सामान को लेकर भी सावधानी जरूरी है। एक लैपटॉप या एक कैमरा व्यक्तिगत उपयोग के लिए सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर कोई यात्री कई महंगे गैजेट्स या सील पैक बॉक्स में सामान लाता है, तो कस्टम जांच बढ़ सकती है। प्रोफेशनल उपकरण के मामले में संबंधित दस्तावेज साथ रखना बेहतर रहता है।
यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गिफ्ट आइटम- जैसे मोबाइल, घड़ी या अन्य महंगे सामान, भी बैगेज वैल्यू में गिने जाते हैं। तय सीमा से ज्यादा होने पर ड्यूटी देनी पड़ सकती है।
सामान नया है या इस्तेमाल किया हुआ, इससे भी फर्क पड़ता है। इस्तेमाल किए गए सामान को आमतौर पर पर्सनल इफेक्ट माना जाता है, जबकि नए और पैक सामान को हाल ही में खरीदा गया माना जा सकता है।
अगर किसी को नियमों को लेकर संदेह है, तो सबसे सुरक्षित तरीका है कि एयरपोर्ट पर स्वेच्छा से डिक्लेरेशन कर दिया जाए। ड्यूटी देना भले थोड़ा असुविधाजनक लगे, लेकिन सामान जब्त होने या जुर्माने से बचना ज्यादा जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा को आसान बनाने के लिए पहले से नियमों की जानकारी लेना और जरूरी दस्तावेज साथ रखना जरूरी है। इससे कस्टम जांच एक सामान्य प्रक्रिया बन जाती है, न कि तनाव का कारण।
(प्रियंका कुमारी)










