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आज 1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू हो गया है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह अब नया 'आयकर अधिनियम 2025' लागू हो गया है। सैलरी स्ट्रक्चर, ATM विड्रॉल और FASTag के नियमों में भी बड़े बदलाव हुए हैं।

New Rules: आज 1 अप्रैल 2026 है और नए वित्त वर्ष (FY 2026-27) के पहले ही दिन आपकी जेब का गणित पूरी तरह बदल गया है। भारत में आज से टैक्स, सैलरी और बैंकिंग से जुड़े कई ऐसे क्रांतिकारी बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आपके घर के बजट और आपकी 'इन-हैंड' सैलरी पर पड़ने वाला है।

छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट की विदाई से लेकर एटीएम से पैसे निकालने के नए चार्ज तक, यहां जानें उन 5 बड़े बदलावों के बारे में जो आज सुबह से प्रभावी हो चुके हैं:

1. इतिहास बना पुराना टैक्स कानून
आज से देश में छह दशक पुराना 'आयकर अधिनियम 1961' खत्म हो गया है। इसकी जगह अब नया 'आयकर अधिनियम 2025' प्रभावी हो गया है। यह नया कानून इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग और प्रत्यक्ष कर प्रणाली को पहले से कहीं अधिक सरल और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

2. कम हो जाएगी आपकी 'टेक-होम' सैलरी
नौकरीपेशा लोगों के लिए आज से नए लेबर कोड लागू हो रहे हैं। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को कर्मचारी की 'बेसिक सैलरी' कुल वेतन का कम से कम 50% रखनी होगी। इससे आपके पीएफ (PF) में योगदान तो बढ़ेगा और भविष्य सुरक्षित होगा, लेकिन हर महीने घर आने वाली (In-hand Salary) कम हो जाएगी।

3. ATM से कैश निकालना हुआ महंगा
बैंकिंग क्षेत्र में आज से नए चार्ज लागू हो गए हैं। HDFC बैंक ने एटीएम से UPI के जरिए कैश निकालने पर सख्ती बढ़ा दी है। अब महीने में 5 फ्री ट्रांजैक्शन के बाद हर बार कैश निकालने पर ₹23 का शुल्क देना होगा। कई अन्य बैंकों ने भी एटीएम निकासी की सीमा और चार्जेस में बदलाव किए हैं।

4. FASTag और रेलवे में नए सुधार
आज से हाईवे पर सफर करना और ट्रेन टिकट बुक करना भी बदल गया है। FASTag के सालाना पास की फीस में बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही, भारतीय रेलवे ने टिकट बुकिंग और रिफंड की प्रक्रिया में नए 'टिकटिंग रिफॉर्म्स' लागू किए हैं, ताकि आम यात्रियों को दलालों से राहत मिल सके।

5. PAN और ITR फाइलिंग के नए निर्देश
नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से पैन (PAN) कार्ड और टैक्स अनुपालन के नियमों में भी संशोधन किया गया है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के दावों और अन्य टैक्स छूटों के लिए अब नए दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य होंगे। इन नियमों की अनदेखी करने पर करदाताओं को भविष्य में भारी पेनल्टी भरनी पड़ सकती है।

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