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Tesla EV: टेस्ला ने मार्च तिमाही में 386,800 यूनिट की डिलीवरी रिकॉर्ड की, इसमें कंपनी के अनुमान से सालाना आधार पर 8% की गिरावट आई है। ऐसे में एलन मस्क ने एशियाई मार्केट पर अपना फोकस बढ़ाया है।

(मंजू कुमारी)
Tesla EV: अमेरिका की सबसे बड़ी कार मेकिंग कंपनी टेस्ला (Tesla) ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV- Electric Vehicle) का आयात शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलन मस्क की कंपनी जर्मनी में बनी Tesla EV से भारत में इंपोर्ट करेगी। टेस्ला ने बर्लिन शहर में बने प्लांट में राइट हैंड ड्राइव कारों का निर्माण शुरू कर दिया है। हालांकि, सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी भारत में टेस्ला की बहुप्रतीक्षित एंट्री का रास्ता साफ करेगी। इसके साथ ही कंपनी शंघाई से एक्सपोर्ट का वैल्यूएशन भी जारी रखेगी।

पिछले जुलाई में आई रिपोर्ट में सामने आया था कि टेस्ला के अधिकारियों ने हेवी इंडस्ट्री और वाणिज्य मंत्रालय के साथ मीटिंग में भारतीय बाजार के लिए अपने बर्लिन गीगाफैक्ट्री से इलेक्ट्रिक व्हीकल इंपोर्ट पर बातचीत की थी, जो कि शंघाई के उलट है। 

EV पॉलिसी के लिए जल्द जारी होंगी गाइडलाइन
दूसरी ओर, मोदी सरकार नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के साथ इसके लिए 60-70 दिन में गाइडलाइन जारी करने की योजना बना रही है। हालांकि इस नीति में ऐलान के 120 दिनों के अंदर आवेदन शुरू करने का प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक, भारत की नई नीति में ईवी आयात के सोर्स देश के लिए कोई पसंदीदा डेस्टिनेशन का जिक्र नहीं है।

टेस्ला बर्लिन फैक्ट्री में भारत के लिए कारें बना रही
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने गुरुवार को बताया कि टेस्ला ने 2024 की दूसरी छमाही में भारत में निर्यात के लिए बर्लिन स्थित अपनी चार गीगा सुविधाओं में से एक फैक्ट्री में राइट-हैंड ड्राइव मॉडल का प्रोडक्शन शुरू कर दिया। इसके साथ ही कंपनी ने भारतीय में मैन्यूफ्रैक्चरिंग यूनिट शुरू करने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में साइट के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है। अप्रैल के अंत में टेस्ला की एक टीम इसके अध्ययन के लिए भारत आ सकती है। 

लोकल मैन्यूफ्रैक्चरिंग में 50% हिस्सेदारी करनी होगी
पिछले महीने एक नोटिफिकेशन में केंद्र ने कहा था कि ईवी निर्माताओं को हर साल 70% से कम आयात शुल्क पर 35,000 डॉलर या उससे अधिक कीमत वाले 8,000 ईवी आयात करने की अनुमति देगा, अगर वे भारत में तीन सालों के लिए कम से कम 500 मिलियन डॉलर निवेश करने की इच्छा रखते हैं। साथ ही उन्हें लोकल मैन्यूफ्रैक्चरिंग भी शुरू करना पड़ेगा। इस दौरान निर्मित वाहनों में 50% घरेलू मूल्यवर्धन (DVA) सुनिश्चित करना होगा, जिसे 5 साल खत्म होने तक 50% तक बढ़ाना होगा। इस स्कीम को भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित किया जा रहा है।

एशियाई बाजार में चीनी कंपनी को टक्कर दे रही टेस्ला
हालांकि, टेस्ला 25,000 डॉलर की किफायती ईवी के लिए शुल्क में कटौती के लिए चर्चा कर रही थी, जिसे वह भारत के लिए तैयार करेगी। ऐसे में कंपवी मॉडल 3 (कीमत करीब 40,000 डॉलर) को भारत में उतारेगी। टेस्ला की मैन्यूफ्रैक्चरिंग यूनिट इंटीग्रेडेट हैं। कंपनी ने मार्च तिमाही में 386,800 यूनिट की डिलीवरी की, जो कि सालाना आधार पर अनुमान से 8 फीसदी कम है। टेस्ला की शंघाई गीगाफैक्ट्री मुख्य निर्यात केंद्र और सबसे बड़ी फैक्ट्री है। कंपनी चीनी प्रतिद्वंद्वी बीवाईडी कड़ी टक्कर दे रही है। बर्लिन और शंघाई के अलावा टेस्ला की 2 अन्य गीगाफैक्ट्री अमेरिका के कैलिफोर्निया और नेवादा में हैं।

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