महायुद्ध की आहट: कतर के अमेरिकी बेस पर हलचल तेज, क्या ट्रंप का अगला कदम होगा सीधा हमला?
ईरान में महंगाई और दमन के खिलाफ भीषण जनविद्रोह जारी है, जिसमें अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
ट्रंप के इस रुख के बाद खबर आई है कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत की पेशकश की है।
नई दिल्ली : ईरान के 100 से अधिक शहरों में महंगाई और दमन के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब एक बड़े तख्तापलट की संभावना में बदल गया है। इस बीच अमेरिका ने कतर स्थित अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे 'अल उदीद' पर भारी हलचल बढ़ा दी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को "बहुत बड़ी कार्रवाई" की चेतावनी दी है, जिसके बाद पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिक गई हैं। यह तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के मैदान में तब्दील होने के कगार पर पहुंच चुका है।
ईरान के 100 शहरों में प्रदर्शन और 500 से ज्यादा मौतें
ईरान में महंगाई और नागरिक अधिकारों के हनन को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 हजार से अधिक लोग हिरासत में लिए गए हैं।
ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को 'ईश्वर का दुश्मन' करार देते हुए उन्हें मृत्युदंड देने की चेतावनी दी है। इंटरनेट पर पूरी तरह पाबंदी होने के बावजूद तेहरान और अन्य बड़े शहरों से आ रही खबरें एक बड़े मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही हैं।
कतर के अल उदीद एयरबेस पर अमेरिकी वॉरगेम
पेंटागन ने कतर स्थित अल उदीद एयरबेस पर अपनी सक्रियता को चरम पर पहुँचा दिया है। 12 जनवरी 2026 को यहाँ एक नया 'कॉम्बाइंड डिफेंस ऑपरेशंस सेल' खोला गया है, जो क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर मिसाइल हमलों को रोकने और जवाबी कार्रवाई के लिए बनाया गया है।
इस बेस पर B-52 बॉम्बर्स और मालवाहक विमानों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है। रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिका यहा से ईरान के भीतर किसी भी समय सर्जिकल स्ट्राइक या बड़े हवाई हमले को अंजाम दे सकता है।
ट्रंप की 'रेड लाइन' और ईरान का बातचीत का दांव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सख्त लहजा अपनाते हुए कहा है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को मारना बंद नहीं किया, तो अमेरिका "मदद के लिए तैयार" है और बहुत कड़ी कार्रवाई करेगा। ट्रंप के इस रुख के बाद खबर आई है कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत की पेशकश की है।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो बैठक से पहले ही सैन्य विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है।
परमाणु ठिकानों पर हमले का मंडराता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के निशाने पर ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकाने सबसे ऊपर हैं। फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फ़हान जैसे क्षेत्रों में ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठान स्थित हैं। हालिया खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने इन ठिकानों की निगरानी बढ़ा दी है।
यदि ट्रंप सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं, तो इन ठिकानों को नष्ट करना उनकी पहली प्राथमिकता हो सकती है ताकि ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को खत्म किया जा सके।
मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट
ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह न केवल अमेरिकी बेस बल्कि इजरायल को भी निशाना बनाएगा। इजरायली सेना पहले से ही हाई अलर्ट पर है और कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अमेरिकी हमलों में प्रत्यक्ष सहयोग दे सकती है।
इस समय मध्य पूर्व में अमेरिका की 19 से अधिक सैन्य चौकियां पूरी तरह सक्रिय हैं। यह स्थिति एक ऐसी चिंगारी की तरह है जो पूरे क्षेत्र को एक विनाशकारी महायुद्ध की आग में झोंक सकती है।