शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के धरने का छठा दिन: अनशन से बिगड़ी तबीयत, मांगों पर अड़े ज्योतिष्पीठ के पीठाधीश्वर

गौ-माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने जैसी मांगों पर अड़े शंकराचार्य ने झुकने से इनकार कर दिया है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

Updated On 2026-01-23 17:48:00 IST

शंकराचार्य की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा सतर्क हो गया है। 

प्रयागराज : ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना आज छठे दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे शंकराचार्य की शारीरिक स्थिति अब चिंताजनक होने लगी है।

लंबे समय से अन्न का त्याग करने के कारण उनके स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की है। इसके बावजूद, शंकराचार्य ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।

स्वास्थ्य में गिरावट और डॉक्टरों की निगरानी

छह दिनों से जारी निरंतर धरने और अनशन का असर अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्वास्थ्य पर साफ दिखने लगा है। चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहने के कारण उनके शरीर में ऊर्जा का स्तर गिर गया है और रक्तचाप में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

मेडिकल टीम ने उन्हें आराम करने और अनशन समाप्त करने की सलाह दी है, लेकिन आध्यात्मिक संकल्प के कारण उन्होंने चिकित्सा सहायता लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है।

धार्मिक मांगों को लेकर अडिग है रुख

शंकराचार्य का यह धरना मुख्य रूप से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों के संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित है।

उनका तर्क है कि सरकार को इन विषयों पर केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस कानून या नीति बनानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा है कि यह संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अस्मिता और मूल्यों की रक्षा के लिए है।

प्रशासनिक अमले में मची खलबली

शंकराचार्य की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा सतर्क हो गया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार धरना स्थल का दौरा कर रहे हैं और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं।

प्रशासन को डर है कि यदि शंकराचार्य की स्थिति और अधिक बिगड़ती है, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति अनियंत्रित हो सकती है, क्योंकि भारी संख्या में अनुयायी धरना स्थल पर जुटना शुरू हो गए हैं।

भक्तों का समर्थन और देशव्यापी चर्चा

इस आंदोलन की गूंज अब देश भर में सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक, विभिन्न धार्मिक संगठनों और संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

धरना स्थल पर मौजूद भक्तों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द संतों की मांगें मान लेनी चाहिए। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस धरने को मिल रहा जनसमर्थन शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।


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