कब्रिस्तान बना 'आवासीय कॉलोनी': अपनों ने ही किया अपनों की कब्रों का सौदा, राजस्व विभाग की मिलीभगत से बड़ा खेल
गोरखपुर के बसंतपुर में 140 साल पुराने कब्रिस्तान पर भू-माफियाओं ने राजस्व दस्तावेजों में हेरफेर कर कब्जा कर लिया है। वक्फ संपत्ति पर अवैध प्लॉटिंग कर "प्लॉट बिकाऊ है" के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
कब्रिस्तान कमेटी के कोषाध्यक्ष मुशीर अहमद खान ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गोरखपुर : गोरखपुर शहर में मुर्दों की शांति में खलल डालने और धार्मिक संपत्तियों को हड़पने का एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।
बसंतपुर बंधे वाली ऐतिहासिक कब्रिस्तान की जमीन को न केवल राजस्व दस्तावेजों में हेरफेर कर कब्जा लिया गया, बल्कि अब वहा खुलेआम प्लॉटिंग कर 'प्लॉट बिकाऊ है' के बोर्ड टांग दिए गए हैं।
यह मामला वक्फ नंबर 1329 (वक्फ चिराग अली शाह) से जुड़ा है, जहा प्रशासन की नाक के नीचे सदियों पुराने कब्रिस्तान को आवासीय कॉलोनी में तब्दील करने की तैयारी चल रही है।
140 साल पुराने दस्तावेजों में दर्ज है कब्रिस्तान का वजूद
रिकॉर्ड्स के मुताबिक, यह कब्रिस्तान बेहद ऐतिहासिक है। बंदोबस्त 1292 फसली यानी सन् 1885 ईस्वी के सरकारी रिकॉर्ड में यह आराजी नंबर 351 के रूप में दर्ज है।
वर्तमान राजस्व अभिलेखों में इसे आराजी नंबर 377 के रूप में पहचाना जाता है। इतने पुख्ता और पुराने दस्तावेजी सबूतों के बावजूद, जालसाजों ने खामोशी के साथ राजस्व विभाग के कागजों में खेल किया और कब्रिस्तान की जमीन को व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में दर्ज करा लिया।
मोतवल्ली के खानदान पर ही लगा 'सौदा' करने का आरोप
वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड बताते हैं कि पूर्व में लुतफुल्लाह नाम के व्यक्ति इस वक्फ के मोतवल्ली हुआ करते थे। राजस्व अभिलेखों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वर्तमान में जिन 18 लोगों के नाम इस जमीन पर दर्ज हैं, वे सभी पूर्व मोतवल्ली लुतफुल्लाह के खानदान के ही सदस्य बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि इन लोगों ने अपनी खानदानी जिम्मेदारी निभाने के बजाय सरकारी कर्मचारियों से मिलीभगत कर कब्रिस्तान को अपनी निजी 'विरासत' घोषित कर दिया और अब इसे बेचने की फिराक में हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल: जिलाधिकारी से शिकायत भी बेअसर
कब्रिस्तान कमेटी के कोषाध्यक्ष मुशीर अहमद खान ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन महीने पहले इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत जिलाधिकारी गोरखपुर से की गई थी।
इसके बावजूद, अब तक न तो अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हुई और न ही राजस्व रिकॉर्ड में गलत तरीके से दर्ज किए गए नामों को हटाने का आदेश दिया गया।
प्रशासन की इस सुस्ती का फायदा उठाकर कब्जाधारी धड़ल्ले से प्लॉटिंग का काम आगे बढ़ा रहे हैं।
वक्फ संपत्तियों पर बढ़ता खतरा
गोरखपुर के बसंतपुर इलाके की यह घटना शहर के अन्य पुराने कब्रिस्तानों की स्थिति पर भी सवालिया निशान लगाती है, जो धीरे-धीरे आवासीय परिसरों में तब्दील होते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों और धार्मिक कमेटियों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि यदि ऐतिहासिक दस्तावेजों की भी अनदेखी की जाएगी, तो वक्फ संपत्तियों और कब्रिस्तानों का वजूद ही खत्म हो जाएगा।