महाराष्ट्र के नतीजों से यूपी में हलचल: सपा के गढ़ में ओवैसी की सेंध और अखिलेश यादव की बढ़ती टेंशन!
यूपी में भी अब सपा को ओवैसी की बढ़ती सक्रियता से निपटने के लिए अपनी 'PDA' रणनीति को और अधिक मजबूत करना होगा।
सपा के लिए यह खतरे की घंटी है क्योंकि मुस्लिम वोटों का बिखराव भाजपा को जीत दिलाने में मदद करता है।
लखनऊ : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणामों ने विपक्षी गठबंधन के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रदर्शन और सपा की सीटों पर पड़ने वाले प्रभाव ने अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। उत्तर प्रदेश में भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
महाराष्ट्र में सपा की स्थिति और ओवैसी का 'फैक्टर'
महाराष्ट्र चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुछ सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ओवैसी की AIMIM ने सपा और महाविकास अघाड़ी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। धुले और मालेगांव जैसे इलाकों में वोट बंटने के कारण सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इससे यह संकेत मिल रहा है कि मुस्लिम मतदाता अब सपा के बजाय स्थानीय या ओवैसी जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जो अखिलेश यादव के लिए यूपी के संदर्भ में डराने वाला है।
यूपी के मुस्लिम वोट बैंक पर मंडराता खतरा
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का मुख्य आधार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रहा है। महाराष्ट्र के नतीजों से यह साफ हुआ है कि जहां भी ओवैसी मजबूती से चुनाव लड़ते हैं, वहां सपा के 'अल्पसंख्यक' वोट बैंक में बिखराव होता है।
यदि यही स्थिति यूपी में आगामी चुनावों नगर निकाय या विधानसभा में रही, तो सपा को अपने मजबूत गढ़ों जैसे पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
अखिलेश यादव की रणनीति पर सवाल और 'इंडिया गठबंधन'
महाराष्ट्र में सपा 'इंडिया गठबंधन' का हिस्सा रही, लेकिन सीटों के बंटवारे और आपसी समन्वय की कमी ने खेल बिगाड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अब यूपी में कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के साथ सीटों के तालमेल को लेकर और अधिक सतर्क होंगे।
महाराष्ट्र की हार ने यह सबक दिया है कि केवल गठबंधन काफी नहीं है, बल्कि ओवैसी जैसे 'वोट कटवा' कारकों से निपटने के लिए एक ठोस जमीनी रणनीति की जरूरत है।
भाजपा को मिलने वाला 'वॉकओवर' और ओवैसी की चुनौती
अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी टेंशन यह है कि मुस्लिम वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलता है। महाराष्ट्र में भी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के कारण भाजपा उम्मीदवारों को आसानी से जीत मिल गई।
ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में पहले ही अपना विस्तार शुरू कर दिया है, जिससे सपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ी हुई है। आने वाले समय में अखिलेश यादव को अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने के लिए नए सिरे से लामबंदी करनी होगी।