हिंदू कम से कम 4 बच्चे पैदा करें: बांदा में धीरेंद्र शास्त्री का जनसंख्या असंतुलन पर बड़ा प्रहार!
धीरेंद्र शास्त्री ने जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि हिंदुओं ने अपनी आबादी नहीं बढ़ाई, तो उनका हाल भी बांग्लादेश जैसा हो जाएगा।
धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार द्वारा प्रचारित 'हम दो-हमारे दो' के नारे पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया।
बांदा : उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित एक धार्मिक समागम के दौरान बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज को चेतावनी देते हुए एक नई बहस छेड़ दी है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या और अन्य समुदायों की बढ़ती आबादी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर 'जनसंख्या असंतुलन' का मुद्दा उठाया।
शास्त्री ने मंच से खुलेआम हिंदुओं को आह्वान किया कि वे अपनी 'दो बच्चों' की मानसिकता को त्यागें और धर्म व राष्ट्र की रक्षा के लिए परिवार का विस्तार करें।
जनसंख्या नीति के दोहरे मापदंडों पर बाबा बागेश्वर का कड़ा प्रहार
धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार द्वारा प्रचारित 'हम दो-हमारे दो' के नारे पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार दो बच्चों की नीति को बढ़ावा देती है और हिंदू इसका पालन भी करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि दूसरे पक्ष पर यह नियम लागू क्यों नहीं होता?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "एक तरफ कानून और मर्यादा की बात होती है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम तीस-तीस बच्चे पैदा कर रहे हैं।
"धीरेंद्र शास्त्री का तर्क था कि जब तक यह नियम सभी पर समान रूप से लागू नहीं होता, तब तक हिंदुओं को अपनी आबादी कम करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
जमीन और अस्तित्व बचाने के लिए आबादी बढ़ाने की पुरजोर अपील
अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं को सीधे शब्दों में आगाह किया कि भविष्य में युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि जनसंख्या की ताकत से लड़े जाएंगे।
उन्होंने कहा, "अगर आपको अपनी पुश्तैनी जमीन, अपनी संस्कृति और अपने अपनों को सुरक्षित रखना है, तो आपको अपनी आबादी बढ़ानी ही होगी।
"उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस क्षेत्र में हिंदुओं की संख्या कम हुई है, वहां उनके लिए रहना और अपनी मान्यताओं को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। इसलिए, शक्ति और संख्या का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।
बांग्लादेश के हालातों का दिया हवाला और हिंदुओं को दी गंभीर चेतावनी
शास्त्री ने पड़ोसी देश बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति का उदाहरण देते हुए भारतीय हिंदुओं को डराया नहीं बल्कि जागरूक करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि अगर भारत में हिंदू इसी तरह अपनी संख्या कम करते रहे, तो आने वाले कुछ दशकों में उनका हश्र भी वैसा ही हो सकता है जैसा आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि "इतिहास गवाह है कि जहां -जहां संख्या कम हुई, वहां-वहां से पलायन करना पड़ा।" उन्होंने हिंदुओं से कहा कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को 'शरणार्थी' बनने से बचाने के लिए कम से कम चार बच्चे पैदा करना समय की मांग है।
"मैं शादीशुदा होता तो मैं भी करता प्लानिंग": व्यक्तिगत टिप्पणी और चुटीला अंदाज
हमेशा की तरह धीरेंद्र शास्त्री ने अपने गंभीर संदेश के बीच में हल्का-फुल्का अंदाज भी अपनाया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि "प्रत्येक हिंदू को अब चार बच्चे पैदा करने का संकल्प लेना चाहिए।" आगे उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि "अभी तो मैं अविवाहित हूं, मेरी शादी नहीं हुई है, वरना मैं भी अपनी फैमिली प्लानिंग आपके सामने रखता कि मैं कितने बच्चे पैदा करने वाला हूं।
बयान के गहरे राजनीतिक और सामाजिक मायने
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान महज एक धार्मिक उपदेश नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। उनके इस भाषण ने देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता की मांग को फिर से हवा दे दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान का असर आने वाले समय में सामाजिक ध्रुवीकरण और चुनावी विमर्श पर भी पड़ सकता है। विपक्ष ने इसे नफरत फैलाने वाला बयान बताया है, जबकि कई हिंदू संगठनों ने इसे समाज के लिए 'वेक-अप कॉल' करार दिया है।