यूपी निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला: SIR प्रक्रिया में अब सामान्य निवास प्रमाणपत्र नहीं होगा मान्य, नई सूची के लिए मांगे कड़े दस्तावेज

यूपी निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए नियमों को सख्त कर दिया है। अब नाम जुड़वाने के लिए राज्य सरकार का सामान्य निवास प्रमाणपत्र मान्य नहीं होगा।

Updated On 2026-01-22 13:00:00 IST

​एसआईआर की इस पूरी प्रक्रिया के लिए नया शेड्यूल जारी कर दिया गया है। 

लखनऊ : ​उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR-2026) के दौरान धांधली रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने नियमों को सख्त कर दिया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशानुसार, अब केवल राज्य सरकार का 'डोमिसाइल सर्टिफिकेट' दिखाकर मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़वाया जा सकेगा।

आयोग का मानना है कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र कई बार उस विशिष्ट पते की पुष्टि नहीं करता जहा व्यक्ति वर्तमान में रह रहा है, इसलिए अब 12 वैकल्पिक दस्तावेजों की सूची अनिवार्य कर दी गई है।

​सामान्य निवास प्रमाणपत्र क्यों हुआ बाहर?

​निर्वाह आयुक्त कार्यालय के अनुसार, अक्सर देखा गया है कि लोग पुराने या पुश्तैनी पते के आधार पर निवास प्रमाणपत्र बनवा लेते हैं, जबकि वे वर्तमान में कहीं और रह रहे होते हैं।

मतदाता सूची के लिए सटीक वर्तमान पते की आवश्यकता होती है। चूंकि SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 3.26 करोड़ मतदाताओं के डेटा का सत्यापन होना है, इसलिए आयोग ने 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' को दूर करने के लिए इस दस्तावेज़ को सूची से हटा दिया है।

​इन 12 दस्तावेजों में से कोई एक होना जरूरी

​अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सुधार के लिए आपको निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए इन दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा:-

​आधार कार्ड (सबसे प्रमुख दस्तावेज़)

​भारतीय पासपोर्ट

​ड्राइविंग लाइसेंस

​बैंक या पोस्ट ऑफिस की करंट पासबुक (फोटो के साथ)

​राशन कार्ड (वर्तमान पते वाला)

​बिजली, पानी या गैस कनेक्शन का बिल (पिछले 1 साल का)

​रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट या सेल डीड (मकान के कागजात)

​3.26 करोड़ मतदाताओं को भेजे जा सकते हैं नोटिस

​यूपी में चल रही इस विशेष जांच के दायरे में करीब 3.26 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 1.04 करोड़ ऐसे लोग हैं जिनका डेटा 2003 की पुरानी सूचियों से मेल नहीं खा रहा है, जबकि 2.22 करोड़ लोगों के डेटा में 'लॉजिकल एरर' (जैसे माता-पिता और बच्चों की उम्र में बहुत कम अंतर होना) पाए गए हैं।

इन सभी लोगों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है, जहा उन्हें ऊपर बताए गए वैध दस्तावेज दिखाने होंगे।

​बीएलओ के माध्यम से होगा भौतिक सत्यापन

​निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल फॉर्म भर देना काफी नहीं होगा। बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर यह जांच करेंगे कि आवेदन करने वाला व्यक्ति वास्तव में उस पते पर रह रहा है या नहीं।

यदि कोई व्यक्ति सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होता या निर्धारित दस्तावेज पेश नहीं कर पाता, तो उसका नाम मतदाता सूची से काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

​अंतिम मतदाता सूची की समयसीमा तय

​एसआईआर की इस पूरी प्रक्रिया के लिए नया शेड्यूल जारी कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

आयोग ने अपील की है कि मतदाता समय रहते अपने दस्तावेजों को दुरुस्त कर लें ताकि उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

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