​'धर्म की आड़ में कालनेमि कर रहे सनातन को कमजोर': शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी का बड़ा हमला

प्रयागराज माघ मेला विवाद के बीच सीएम योगी ने 'कालनेमि' प्रसंग के जरिए उन लोगों पर निशाना साधा जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर कर रहे हैं।

Updated On 2026-01-22 15:14:00 IST

सीएम ने संकेत दिया कि जो लोग खुद को धर्म का ध्वजवाहक बताते हैं, उन्हें अपने आचरण में भी पवित्रता।

प्रयागराज: ​प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिले नोटिस और प्रशासनिक सख्ती के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान राजनीति और धर्म की गलियों में चर्चा का विषय बन गया है।

सीएम योगी ने कड़े शब्दों में कहा कि आज के दौर में भी कई ऐसे 'कालनेमि' सक्रिय हैं जो भगवा वस्त्र धारण कर या धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को भीतर से कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब संगम तट पर प्रशासन और एक बड़े धार्मिक धड़े के बीच 'धर्म सत्ता बनाम राजसत्ता' का विवाद चरम पर है।


​'कालनेमि' प्रसंग से छद्म वेशधारियों पर तीखा प्रहार

​मुख्यमंत्री ने त्रेतायुग के 'कालनेमि' राक्षस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार उसने हनुमान जी का मार्ग रोकने के लिए साधु का वेश धारण कर उन्हें भ्रमित करने का प्रयास किया था, ठीक उसी प्रकार आज भी कुछ तत्व समाज को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने विस्तार से समझाया कि केवल वेशभूषा धारण कर लेने से कोई धर्मात्मा नहीं हो जाता। सीएम ने संकेत दिया कि जो लोग खुद को धर्म का ध्वजवाहक बताते हैं, उन्हें अपने आचरण में भी वही पवित्रता और सत्यता दिखानी चाहिए, अन्यथा समाज उन्हें 'आधुनिक कालनेमि' के रूप में ही याद रखेगा।

​सनातन की मजबूती के लिए व्यक्तिगत अहंकार त्याग और अनुशासन जरूरी

​सीएम योगी ने अपने संबोधन में अनुशासन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सनातन धर्म की नींव ही मर्यादा और नियमों पर टिकी है।

उन्होंने कहा कि सनातन को बाहरी शत्रुओं से उतना खतरा नहीं है, जितना उन लोगों से है जो व्यवस्था को अपने अहंकार के नीचे दबाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजसत्ता का परम कर्तव्य धर्म और उसके अनुयायियों की सुरक्षा करना है, लेकिन व्यवस्था और सुरक्षा नियमों का पालन करना हर नागरिक और संत की जिम्मेदारी है।

नियमों का उल्लंघन करना न केवल कानून का अनादर है, बल्कि यह सनातन की मूल भावना के भी विपरीत है।

​शंकराचार्य विवाद और प्रशासनिक सख्ती को मिला मुख्यमंत्री का मौन समर्थन

​हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने पूरे भाषण में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम एक बार भी नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों के तीर सीधे माघ मेला प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस की ओर इशारा कर रहे थे।

प्रशासन ने स्वामी जी पर सुरक्षा घेरा तोड़ने, प्रतिबंधित मार्ग पर बग्घी ले जाने और श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया है।

सीएम के इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के मामले में किसी भी व्यक्ति की धार्मिक हैसियत के आगे झुकने वाली नहीं है।

​सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर में बाधा डालने वाले तत्वों की पहचान

​मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहे सांस्कृतिक कार्यों, जैसे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और काशी-विश्वनाथ धाम के कायाकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है।

ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रहा है, तब कुछ लोग आपसी विवादों, कानूनी अवमानना और नियमों के उल्लंघन के जरिए सनातन की वैश्विक छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निजी स्वार्थों को धर्म से ऊपर रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए गलत उदाहरण पेश करता है।

​असली साधु-संतों से एकजुटता और छद्म वेशधारियों को पहचानने का आह्वान

​अपने संबोधन के समापन में सीएम योगी ने देशभर से आए विद्वान संतों और सनातन प्रेमियों से अपील की कि वे ऐसे तत्वों को पहचानें जो धर्म के नाम पर अराजकता को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा की जा रही सख्ती किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि करोड़ों आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।

मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि प्रयागराज की धरती न्याय और मर्यादा की धरती है, यहा व्यवस्था को चुनौती देने वालों के साथ राजसत्ता पूरी कठोरता से निपटेगी।

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