MP Teacher Protest: ई-अटेंडेंस ऐप के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे शिक्षक, 18 जनवरी को भोपाल में देंगे धरना

प्रदेशभर के शिक्षक अपनी मांगों और ऐप से जुड़ी तकनीकी खामियों को लेकर 18 जनवरी को भोपाल के अंबेडकर पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

Updated On 2026-01-17 12:24:00 IST

मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेशभर के शिक्षक अपनी मांगों और ऐप से जुड़ी तकनीकी खामियों को लेकर 18 जनवरी को भोपाल के अंबेडकर पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने इसे अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का निर्णायक कदम बताया है।

शिक्षकों का कहना है कि वे उपस्थिति दर्ज कराने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन व्यक्तिगत मोबाइल और निजी डेटा के उपयोग को अनिवार्य करना उन्हें प्रताड़ना जैसा लग रहा है। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी सहमति के बिना निजी मोबाइल और इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करने को मजबूर कर रही है।

मध्य प्रदेश शिक्षक नेता सतेन्द्र सिंह तिवारी ने प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे 18 जनवरी को बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचें। धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस ऐप में मौजूद तकनीकी विसंगतियों को दूर करने की मांग की जाएगी।

शिक्षकों का आरोप है कि ऐप के जरिए चेहरे की पहचान, बैंक खाता, समग्र आईडी और माता-पिता से जुड़ी जानकारी ली जा रही है, जिससे डेटा लीक होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, 24 घंटे लोकेशन ऑन रखने की बाध्यता को भी उन्होंने निजी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए खतरा बताया है।

शिक्षकों का दावा है कि नवंबर महीने से हजारों शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, जबकि वे नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित थे। नेटवर्क समस्या, सर्वर डाउन या ऐप में लॉगिन फेल होने के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी, जिसका सीधा असर उनके वेतन पर पड़ा।

दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में कमजोर नेटवर्क और ऐप की तकनीकी खराबियों के कारण शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद उनके साथ साइबर फ्रॉड जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि व्यक्तिगत मोबाइल ऐप की जगह स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जाएं, तकनीकी कारणों से रोके गए वेतन को तुरंत जारी किया जाए और मैनुअल रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति को ही वेतन का आधार माना जाए।

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