पानीपत में आवारा घोड़ों का आतंक: बेकाबू जानवर ने चबा डाली युवक की हड्डी, AIIMS रेफर, 10 दिनों में एक दर्जन लोग लहूलुहान
लोगों का आरोप है कि पास की झुग्गी वाले अपने घोड़ों को खुला छोड़ देते हैं, जो अब आदमखोरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी से नाराज लोग अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
घोड़े के हमले के बाद मौके पर जमा भीड़ व घटना की जानकारी देता घायल।
हरियाणा के पानीपत में शहर के एक पॉश इलाके में आवारा घोड़ों ने इस कदर आतंक मचा रखा है कि अब लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। पिछले 10 दिनों के भीतर इन हिंसक घोड़ों ने करीब 12 लोगों को अपना निशाना बनाया है। हमले इतने भीषण हैं कि किसी की पसलियां टूट गई हैं तो किसी के हाथ की हड्डी घोड़े ने दांतों से चबा डाली है। घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई लोगों को आईसीयू (ICU) और दिल्ली एम्स (AIIMS) तक रेफर करना पड़ा है।
पसलियां टूटी और हड्डियां चबाईंपानीपत के सेक्टर 24 स्थित वार्ड नंबर 14 में इन दिनों दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों के अनुसार आवारा घूम रहे ये घोड़े अचानक हिंसक हो जाते हैं और राहगीरों पर जानलेवा हमला कर देते हैं। ताजा घटनाओं में एक युवक जब सड़क से गुजर रहा था, तो घोड़े ने उसे जमीन पर गिराकर उसकी छाती पर पैर रख दिया, जिससे उसकी पसलियां टूट गईं। वहीं, एक अन्य मामले में घोड़े ने युवक का हाथ अपने जबड़े में दबाकर उसकी हड्डी तक चबा डाली।
घोड़ों के जानलेवा हमले में कई लोग गंभीर रूप से चोटिल
• अनिल गिरधर (दिल्ली एम्स में भर्ती) : अनिल सुबह की सैर के लिए पार्क जा रहे थे, तभी एक घोड़े ने उनका पीछा कर उन्हें जमीन पर पटक दिया। घोड़े ने उनकी छाती पर इतना दबाव बनाया कि पसलियां चकनाचूर हो गई। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें दिल्ली एम्स रेफर किया गया है।
• प्रशांत (कलाई में फ्रैक्चर) : प्रशांत पर हुए हमले ने सबको चौंका दिया। घोड़े ने अचानक उनकी कलाई को अपने दांतों से पकड़ लिया और हड्डी चबा डाली। अब उनके हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है और वे लंबे समय के लिए बेड रेस्ट पर हैं।
• कपिल (गर्दन और जबड़े पर वार) : कपिल नामक युवक पर घोड़े ने पीछे से हमला किया और उनकी गर्दन को अपने मुंह में दबा लिया। इस हमले में उनके जबड़े और गर्दन पर गंभीर घाव आए हैं।
स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा
सेक्टर के प्रधान कमल और अन्य निवासियों ने इस समस्या के लिए पास की झुग्गियों में रहने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि झुग्गीवासी अपने घोड़ों को खुला छोड़ देते हैं, जो चारे की तलाश में सड़कों पर आते हैं और हिंसक हो जाते हैं। सेक्टर वासियों का कहना है कि वे पहले आवारा कुत्तों और बंदरों से परेशान थे, लेकिन अब घोड़ों ने जान लेना शुरू कर दिया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर घोड़ा मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरी घटना ने नगर निगम की मुस्तैदी की पोल खोल दी है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। अभी तक किसी भी घोड़े को पकड़ने या उनके मालिकों पर शिकंजा कसने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
दहशत में बच्चे और बुजुर्ग
घोड़ों के हमलों की वजह से वार्ड 14 के लोग अपने बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे हैं। घायलों में से तीन की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें तत्काल ऑपरेशन और आईसीयू की जरूरत पड़ी। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि शाकाहारी माने जाने वाले ये जानवर अचानक इतने मांसाहारी व्यवहार और हिंसक प्रवृत्ति पर कैसे उतर आए हैं।
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