पानीपत रेलवे TTE हत्याकांड: पांचों दोषियों को अंतिम सांस तक जेल की सजा, तीन साल बाद मिला न्याय
हत्या 5 अक्टूबर 2022 की शाम सनौली रोड पर हुई थी, जहां हमलावरों ने मनप्रीत और उसके दोस्त पर चाकुओं और डंडों से हमला किया था।
हरियाणा के पानीपत में जिला एवं सत्र न्यायालय ने करीब तीन साल पहले हुए बहुचर्चित रेलवे टीटीई (TTE) मनप्रीत मलिक हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी नीतीश समेत सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद यानी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शी बने न्याय का आधार
इस सनसनीखेज मामले में न्याय की राह आसान नहीं थी, लेकिन तकनीक और चश्मदीद गवाहों की मजबूती ने दोषियों को अंजाम तक पहुंचाया। वारदात के समय घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरों में हमलावरों की क्रूरता कैद हो गई थी, जिसने पुलिस की चार्जशीट को पुख्ता किया। इसके अलावा, मृतक के चाचा ने कोर्ट में चश्मदीद के तौर पर डटकर गवाही दी। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने आरोपियों को कड़ा दंड दिया। सजा पाने वालों में कुराड़ गांव का नीतीश, जयकरण और कार्तिक शामिल हैं, जबकि सचिन और कपिल भी अब उम्रकैद की सजा काटेंगे।
धारदार चाकू और डंडों से किया था हमला
यह पूरी वारदात 5 अक्टूबर 2022 की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उग्राखेड़ी निवासी हिम्मत सिंह ने बताया कि शाम करीब 7:30 बजे सनौली रोड पर गोयल मार्बल के पास उनका भतीजा मनप्रीत और उसका दोस्त मनीष मौजूद थे। अचानक आधा दर्जन से अधिक युवकों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों के पास धारदार चाकू और भारी डंडे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मनप्रीत को निशाना बनाते हुए उसकी छाती, कमर और हाथों पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए गए। यह हमला इतना अचानक और हिंसक था कि मनप्रीत को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
अस्पताल ले जाते समय थमी सांसें
वारदात के बाद लहूलुहान हालत में मनप्रीत और मनीष को तुरंत पानीपत के अस्पताल ले जाया गया। मनप्रीत की स्थिति बहुत चिंताजनक थी, जिसके कारण डॉक्टरों ने उसे उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) के लिए रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, रास्ते में ही मनप्रीत ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था।
हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद
तफ्तीश के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। मुख्य आरोपी नीतीश की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद हुआ, जबकि अन्य आरोपियों से डंडे और वारदात से जुड़े अन्य सबूत हासिल किए गए। पुलिस की सतर्कता के कारण एक अहम मोड़ यह भी आया कि शुरुआती जांच में नामजद किए गए अरविंद गुर्जर को निर्दोष पाया गया। गवाहों के बयानों और मौके की तस्दीक के बाद पुलिस ने उसे मामले से बाहर कर दिया था, जिससे असली दोषियों पर शिकंजा कसना आसान हुआ।
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