हरियाणा म्यूजिक इंडस्ट्री पर पुलिस का शिकंजा: 29 गायकों के 'भड़काऊ' गानों पर पाबंदी, मासूम शर्मा के सबसे ज्यादा गाने रडार पर
पुलिस के अनुसार 'कोर्ट में गोली' और 'ट्यूशन बदमाशी का' जैसे गीत न्यायपालिका का मजाक उड़ाते हैं और हिंसा को एक हुनर के तौर पर पेश करते हैं।
मासूम शर्मा।
हरियाणा पुलिस ने संगीत जगत में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाले कंटेंट के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। हालिया जांच में 67 ऐसे गानों की पहचान की गई है जो सीधे तौर पर अपराधियों का महिमामंडन करते हैं या कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हैं। इस कार्रवाई के तहत कुल 29 गायकों को पुलिस की निगरानी सूची में रखा गया है।
इस सूची में सबसे बड़ा नाम मशहूर हरियाणवी गायक मासूम शर्मा का है, जिनके 19 गानों को आपत्तिजनक माना गया है। इसके अलावा राज्य के अन्य लोकप्रिय कलाकार जैसे अमित सैनी रोहतकिया और मनीषा शर्मा भी पुलिस की रडार पर हैं।
कई गानों में न्यायपालिका का अपमान किया गया
पुलिस की जांच में पाया गया है कि कई गानों में न्यायपालिका का अपमान किया गया है। राहुल पुथी और आशु ट्विंकल के गाने 'कोर्ट में गोली' ने इंटरनेट पर सनसनी फैलाई है, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं। इसके बोल- भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान, जज के भी पसीने आएंगे— सीधे तौर पर कानून को ठेंगा दिखाने जैसा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे शब्द न केवल समाज में डर का माहौल पैदा करते हैं, बल्कि अपराधियों के मन से न्याय का खौफ भी खत्म करते हैं।
बदमाशी का 'ट्यूशन' और अपराध की शिक्षा
मासूम शर्मा और मनीषा शर्मा का एक और गाना 'ट्यूशन बदमाशी का' पुलिस के निशाने पर है। इस गीत में आपराधिक दुनिया में प्रवेश करने और हथियारों के इस्तेमाल को एक 'कोर्स' या ट्रेनिंग की तरह पेश किया गया है। गाने के चित्रण में अदालती परिसर के भीतर हिंसा दिखाई गई है, जो युवाओं के मानस पटल पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे वीडियो जो हिंसा को एक कौशल या स्टाइल के तौर पर दिखाते हैं, उन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा।
इन कलाकारों पर गिरी गाज
पुलिस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार इन गायकों के गाने विवादों में हैं। गायकों के नाम और आपत्तिजनक गानों की संख्या नीचे दी जा रही है।
1- मासूम शर्मा 19 गाने
2- आशु ट्विंकल 08 गाने
3- मनीषा शर्मा 07 गाने
4- नरेंद्र भगाना 06 गाने
5- अमित सैनी रोहतकिया 06 गाने
इनके अलावा 60 मुकदमे, तालिबान और असला का कीर्तन जैसे गानों पर भी रोक लगाने की तैयारी है। ये गाने अपराध को एक गौरवशाली जीवनशैली के रूप में चित्रित करते हैं।
पुलिस का सख्त रुख
एसटीएफ (STF) के आईजी सतीश बालन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी कलाकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उस विचारधारा के खिलाफ है जो समाज में असुरक्षा पैदा करती है। उन्होंने कहा कि गायकों और गीतकारों के साथ संवाद किया गया है और उन्हें साफ लहजे में समझा दिया गया है कि हथियारों और अपराध का गुणगान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, डीजीपी अजय सिंघल ने इस कदम को युवाओं के भविष्य के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा इस समय सीमा पार से चल रहे गैंग्स और जबरन वसूली जैसे अपराधों से लड़ रहा है। ऐसे में संगीत के माध्यम से 'गैंगस्टर कल्चर' को बढ़ावा देना आग में घी डालने जैसा है।
67 गानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू
हरियाणा पुलिस की यह कार्रवाई राज्य की नई पीढ़ी को अपराध के ग्लैमर से बचाने की एक कोशिश है, 67 गानों की पहचान के बाद अब उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रशासन की इस सख्ती ने कलाकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मनोरंजन की सीमा कहां समाप्त होती है और अपराध का प्रचार कहां से शुरू होता है।