शहीद मोहित चौहान को अंतिम विदाई: झज्जर में राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि, उमड़ पड़ा जनसैलाब

डोडा में सेना का वाहन गहरी खाई में गिरने के कारण मोहित ने देश के लिए अपनी शहादत दी थी। उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली और पुष्पवर्षा कर उन्हें नमन किया।

Updated On 2026-01-24 17:04:00 IST

झज्जर में शहीद मोहित चौहान को अंतिम विदाई देने उमड़े लोग। 

हरियाणा की वीरधरा झज्जर ने आज अपने एक और लाल को देश की रक्षा में न्योछावर कर दिया। जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए दर्दनाक हादसे में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज सिपाही मोहित चौहान का शनिवार को उनके पैतृक गांव गिजाड़ोध में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा आसमान 'शहीद मोहित अमर रहे' के नारों से गूंज उठा।

छोटे भाई ने दी मुखाग्नि

शहीद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कैप्टन सौरभ कुमार की अगुवाई में सेना की टुकड़ी ने गन फायर कर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने के बाद मोहित के छोटे भाई जितेंद्र ने भारी मन से उन्हें मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण के दौरान सैन्य अधिकारियों ने शहीद के पिता सतपाल चौहान को वह तिरंगा सौंपा, जिसमें लिपटकर उनका बेटा घर लौटा था। अपने कलेजे के टुकड़े को अंतिम विदाई देते समय पिता की आंखें भर आईं, वहीं वहां मौजूद हर शख्स की पलकें भी नम थीं।

गर्भवती पत्नी का विलाप- वादा किया था कि सही सलामत लौटेंगे...

शहीद मोहित के घर पर दृश्य अत्यंत हृदयविदारक था। मोहित की शादी लगभग एक साल पहले ही अंजलि से हुई थी और वह वर्तमान में ढाई महीने की गर्भवती हैं। पति का पार्थिव शरीर देखते ही अंजलि बेसुध होकर गिर पड़ीं। रोते हुए उन्होंने सेना के अधिकारियों से कहा, "मैंने उन्हें ऐसा नहीं भेजा था, वे सही सलामत ड्यूटी पर गए थे। पिछली बार जब वे गए तो वापस आने का वादा करके गए थे और मुझे भी अपने साथ ले जाने की बात कही थी।" परिवार की महिलाओं ने अंजलि को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन पति को खोने का दुख उनके लिए असहनीय था।

गांव तक निकाली गई बाइक रैली

इससे पहले, जब सेना का विशेष वाहन शहीद मोहित के पार्थिव शरीर को लेकर झज्जर पहुंचा तो रास्ते भर स्थानीय निवासियों ने पुष्पवर्षा कर शहीद का अभिनंदन किया। शहर की सीमाओं से लेकर गांव गिजाड़ोध तक युवाओं ने अपने हाथों में तिरंगा लेकर बाइक रैली निकाली। युवाओं का जोश देखने लायक था, हर कोई मोहित के साहस और उनके देशप्रेम की मिसाल दे रहा था। गांव की गलियां और सड़कें मोहित के सम्मान में उमड़े लोगों से अटी पड़ी थीं।

डोडा हादसे में गंवाई थी जान

22 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा क्षेत्र में सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा था। इस भीषण दुर्घटना में मोहित चौहान समेत सेना के 10 बहादुर जवानों ने अपनी शहादत दी थी। मोहित लगभग 5 साल पहले सेना में सिपाही के पद पर नियुक्त हुए थे और पिछले दो वर्षों से उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों में थी।

संघर्षों से भरा रहा मोहित का सफर

गांव के सरपंच नरेश कुमार ने मोहित की यादों को साझा कर बताया कि मोहित बचपन से ही बेहद मेहनती थे। उनके पिता सतपाल खेती-किसानी करते हैं और मोहित ने बिना किसी पारिवारिक सैन्य पृष्ठभूमि के अपनी मेहनत से सेना में जगह बनाई थी। वे अपनी स्कूली शिक्षा के लिए रोजाना गांव से 4 किलोमीटर दूर सिलानी गांव के सरकारी स्कूल पैदल जाते थे। सेना में भर्ती होने का जुनून उन पर इस कदर सवार था कि वे गांव की सड़कों पर सुबह-शाम जमकर दौड़ लगाते थे। मोहित अपने पीछे पिता, माता, छोटा भाई और गर्भवती पत्नी को छोड़ गए हैं।

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