Al-Falah: अल-फलाह के चेयरमैन जवाद अहमद की बढ़ी मुश्किलें, दिल्ली की साकेत कोर्ट ने न्यायिक हिरासत बढ़ाई
Al-Falah Group Chairman: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी न्यायिय हिरासत को बढ़ा दिया है।
अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत बढ़ी।
Al-Falah Group Chairman: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आज 31 जनवरी शनिवार को अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी न्यायिय हिरासत को बढ़ा दिया है। बता दें कि ED ने 16 जनवरी को सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। अब इस चार्जशीट पर कोर्ट 13 फरवरी को सुनवाई करेगा। एडिशनल सेशंस जज (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान ने सिद्दीकी के वकील की दलीलें सुनने के बाद मामले को 13 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है, क्योंकि चार्जशीट के साथ दायर डॉक्यूमेंट्स की जांच के लिए समय मांगा गया था।
क्राइम ब्रांच ने दर्ज की थी FIR
ईडी की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) साइमन बेंजामिन पेश हुए थे। ईडी ने पहले कहा था कि चार्जशीट का संज्ञान लेने के लिए सबूत काफी है, जो आरोपी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट मामला है। एजेंसी का कहना है कि इस जांच को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई 2 FIR के आधार पर शुरू किया गया था। FIR में आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) से गलत तरीके से मान्यता का दावा किया था।
ED ने कोर्ट को बताया कि उसने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी जांच के हिस्से के रूप में अस्थायी रूप से संपत्तियों को अटैच किया है। ED ने कोर्ट को यह भी बताया था कि सिद्दीकी को अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने यह कार्रवाई क्राइम ब्रांच की FIR दर्ज करने के बाद शुरू की थी।
ED ने गुमराह करने का आरोप लगाया
एफआईआर में आरोप लगा था कि यूनिवर्सिटी और उसके संस्थानों ने गलत तरीके से एक्सपायर्ड NAAC मान्यता ग्रेड का विज्ञापन किया था। ED का आरोप है कि इन मान्यता के दावों को छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए गढ़ा था। जिसके तहत गलत तरीके से एडमिशन और फीस को वसूला गया था।
कई जगहों पर तलाशी के दौरान एजेंसी ने कैश, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड को जब्त किया था। ED का यह भी कहना था कि कुछ कॉन्ट्रैक्ट कथित तौर पर आरोपी के परिवार से जुड़ी संस्थाओं को भेजे गए थे। बड़े वित्तीय फैसलों को मंजूरी देने के लिए सिद्दीकी की भूमिका सामने आई थी।
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