Ghaziabad: गाजियाबाद में आपात स्थिति के लिए बड़ी तैयारी, सिविल डिफेंस बनाएगा बंकर और शेल्टर
गाजियाबाद में आपातकाल या फिर युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए सिविल डिफेंस विभाग ने शहर के सभी बेसमेंट को बंकर और शेल्टर होम के रूप में तैयार करने की योजना बनाई है।
गाजियाबाद में सिविल डिफेंस बनाएगा बंकर और शेल्टर
Ghaziabad Hindi News: गाजियाबाद में किसी भी आपातकालीन स्थिति या युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। सिविल डिफेंस विभाग ने शहर के सभी बेसमेंट को बंकर और शेल्टर होम के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। इसके तहत जिला प्रशासन (जिला मजिस्ट्रेट) से पूरे जिले में मौजूद सभी बेसमेंट की पूरी जानकारी मांगी गई है। पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर (जिसमें भारत ने आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी) के बाद सुरक्षा को मजबूत करने के इस मॉडल को अब तेजी से लागू करने की कोशिश हो रही है।
आपातकाल के लिए प्लान-बी तैयार
सिविल डिफेंस का मुख्य लक्ष्य है कि युद्ध के समय ब्लैकआउट या किसी हमले की स्थिति में आम नागरिकों को सुरक्षित जगह मिल सके। विभाग ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर बेसमेंट की संख्या, जगह और अन्य डिटेल्स मांगी हैं। ताकि इन्हें जरूरी सामान से लैस करके हमेशा तैयार रखा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, एक अच्छा बंकर सिर्फ मजबूत छत वाला कमरा नहीं होता। इसके लिए कुछ जरूरी मानक तय किए गए हैं, जैसे-
- फर्स्ट एड किट (प्राथमिक चिकित्सा सामग्री)।
- आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम।
- लोगों की संख्या के हिसाब से पीने का पानी और डिब्बाबंद सूखा खाना।
- जनरेटर, टॉर्च और बैटरी।
- पर्सनल हाइजीन से जुड़ी जरूरी चीजें (जैसे सैनिटरी आइटम)।
NH-9 के अंडरपास भी बनेंगे सुरक्षित ठिकाने
सिर्फ इमारतों के बेसमेंट ही नहीं, नेशनल हाईवे-9 (NH-9) के अंडरपास को भी सुरक्षा के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिविल डिफेंस ने गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA), नगर आयुक्त, PWD और NHAI से संपर्क किया है। अधिकारियों का कहना है कि NH-9 पर 5 से ज्यादा ऐसे अंडरपास हैं, जो आसानी से दिखाई नहीं देते। इन्हें अच्छे शेल्टर होम के रूप में विकसित किया जा सकता है, क्योंकि ये मजबूत और छिपे हुए स्थान हैं। सिविल डिफेंस के एडीसी (अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर) गुलाम नबी ने कहा, 'हमने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर विस्तृत जानकारी मांगी है। हमारा मकसद है कि हमारे पास पूरी डिटेल हो कि कहां-कहां बेसमेंट हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका तुरंत और प्रभावी इस्तेमाल हो सके।'