डॉक्टर पर हो FIR : छात्रा ने खाया जहर, इलाज में लापरवाही का आरोप, बिना पुलिस को सूचना दिए कर दिया गया डिस्चार्ज

आदिवासी छात्रा के जहरखुरानी और मौत के बाद बवाल मच गया है। परिजनों का आरोप है कि, डॉक्टर की लापरवाही के कारण छात्रा की मौत हो गई। अब परिजन डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे हैं। 

Updated On 2024-10-25 12:16:00 IST
औंधी पुलिस थाना

एनिशपुरी गोस्वामी-मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी से आदिवासी छात्रा के जहरखुरानी और मौत का मामला सामने आया है। कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा ने जहर खा लिया था। परिजन उसे इलाज के लिए औंधी सरकारी अस्पताल लेकर गए। वहां पर डॉक्टर ने घटना की सूचना पुलिस को नहीं देने के एवज परिजनों से पांच हजार रुपए की मांग की। इलाज के अभाव में नाबालिग छात्रा की मौत हो गई। छात्रा का अंतिम संस्कार कर परिजन डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराने पहुंचे हैं। 
 
मिली जानकारी के अनुसार, औंधी हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्यनरत 11वीं की आदिवासी छात्रा भवानी बढाई (15) पिता रामसिंग बढाई ग्राम पंचायत साल्हेभट्टी के आश्रित ग्राम वारकुंजी निवासी ने 14 अक्टूबर को कीटनाशक दवा पी ली। इसके बाद परिजनों ने आनन-फानन में छात्रा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औंधी लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने अगले दिन ही छात्रा के पूरी तरह से ठीक होने की बात कही और उसे डिस्चार्ज कर दिया। 

डिस्चार्ज के दो दिन बाद फिर बिगड़ी तबियत 

इसके बाद 18 अक्टूबर को फिर से छात्रा की तबियत बिगड़ गई। इस बार परिजनों ने उसे राजनांदगांव के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर हालत गंभीर होने के कारण उसे राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया जहां पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा का अंतिम संस्कार करवाने के बाद परिजन और ग्रामीण औंधी में पदस्थ डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने थाना पहुंचे। 

पुलिस को नहीं दी गई घटना की जानकारी

नाबालिग आदिवासी छात्रा के जहरखुरानी और उसके मौत से बवाल मच गया है। औंधी स्वास्थ्य केंद्र से चंद कदम  दूर थाना मौजूद है इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने प्रकरण की सूचना पुलिस को नहीं दी।

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परिजनों से मांगे गए पांच हजार 

मृत छात्रा के परिजनों का आरोप है कि, डॉक्टर ने कंपाउंडर के हवाले उनसे मामला पुलिस को नहीं बताने के एवज में पांच हजार रुपए मांगे। जहरखुरानी कर जब पीड़िता अस्पताल पहुंची तो डॉक्टर ने MLC फार्म नहीं भरा और दो दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया। डिस्चार्ज के समय डॉक्टर ने अमानवीय तरीके से 5 हजार की मांग की। बेहतर इलाज के अभाव में धीरे-धीरे जहर छात्रा के पूरे शरीर में फैल गया और उसकी मौत हो गई। 

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