SIR को लेकर बीजेपी प्रवक्ता ने निर्वाचन आयोग से की शिकायत: ERO की शिकायत तथा दावा- आपत्ति का समय बढ़ाए जाने की मांग
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने ECO को ज्ञापन सौंपकर SIR प्रक्रिया में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6, दावा-आपत्ति एवं फॉर्म-7 प्रस्तुत करने में अवरोध एवं अनियमितता की शिकायत की है।
बीजेपी का झंडा
रायपुर। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने सोमवार को यहाँ राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर SIR प्रक्रिया में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6, दावा-आपत्ति एवं फॉर्म-7 प्रस्तुत करने में अवरोध एवं अनियमितता की शिकायत की है। डॉ. मिश्रा ने संविधान, लोक प्रतिनित्व अधिनियम एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर दावा-आपत्ति हेतु फार्म प्रस्तुत किए जाने की समय सीमा 31 जनवरी 2026 तक बढ़ाने का आग्रह किया है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा द्वारा सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के प्रक्रम में ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन उपरान्त एवं आदेश दिनांक 24 जून 2025 तथा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार भाजपा द्वारा नियुक्त BLA एवं मतदाताओं द्वारा दावा आपत्ति हेतु फॉर्म-7 प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। किंतु यह शिकायत प्राप्त हो रही है कि आयोग द्वारा नियुक्त ERO एवं BLO या तो फॉर्म-7 लेने से ही इंकार कर रहे हैं या निराधार एवं मनगढन्त कारणों से फॉर्म-7 निरस्त कर रहे हैं।
दावा-आपत्ति केंद्रों में नियुक्त BLO नहीं रहते मौजूद
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस आशय की भी विभिन्न शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि दावा-आपत्ति केंद्रों में नियुक्त BLO न तो उपलब्ध रहते हैं और न ही BLO घर-घर जाकर प्राप्त दावा-आपत्ति का सत्यापन कर रहे हैं। दावा आपत्ति केंद्रों में बी.एल.ओ. के पास फॉर्म-7 उपलब्ध ही नहीं हैं जिस कारण मतदाता को दावा-आपत्ति का अवसर प्राप्त नहीं हो रहा है और दावा-आपत्ति निराधार रूप से खारिज की जा रही है। इससे पात्र मतदाताओं का नाम जुड़ नहीं पा रहा है तथा अपात्र मतदाताओं का नाम कट नहीं पा रहा है।
निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत के बाद नहीं दिया जा रहा ध्यान
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने बताया कि इस विषय में जब ERO अथवा जिला निर्वाचन अधिकारियों (जिला कलेक्टरों) को शिकायत की जाती है तो उनके द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। फॉर्म-7 को निराधार रूप से निरस्त किया जाना अथवा स्वीकार न किया जाना SIR तथा संविधान में निहित मतदाताओं के अधिकार का हनन है। हमारे प्रतिनिधियों द्वारा दिनांक 12 जनवरी 2026 को 'भारत निर्वाचन आयोग’ के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर इस विषय में आयोग का ध्यान आकृष्ट किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी को विभिन्न अभ्यावेदन प्रस्तुत किए गए हैं। पत्र में संविधान के अनुच्छेद 324, लोक प्रतिनित्व अधिनियम, 1950 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों का अवलोकन करने का आग्रह करते हुए कहा गया है कि उक्त प्रवधानों मे विहित दायित्वों एवं प्रधिकार तथा बार-बार प्रकाश में लाने के बाद भी प्रदेशभर से ERO एवं BLO द्वारा फार्म-7 स्वीकार न करने अथवा मनगढ़ंत एवं निराधार रुप से निरस्त करने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का आरोप
भाजपा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया में दायित्वों की अवहेलना कर SIR एवं BLO द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के की धारा 32 के अंतर्गत अपराध कारित किया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि इस प्रकार के प्रकरणों में दोषी ERO एवं BLO के द्वारा परोक्ष उद्देश्यों हेतु राष्ट्रीय राजनैतिक दल एवं मतदाताओं को उनके विधिक एवं संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। साथ ही यह अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में विफल रहे हैं। इस कारण SIR प्रक्रिया द्वारा मतदाता सूची के निर्माण, पुनरीक्षण एवं शुद्धिकरण का उद्देश्य विफल हो रहा है। उपरोक्त स्थिति में दावा-आपत्ति हेतु फार्म प्रस्तुत किये जाने की समय सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाया जाना आवश्यक है।