रायपुर-नवा रायपुर के बीच बसेगा 'कनेक्टिंग टाउन': एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ 1 किलोमीटर में बसेंगी बस्तियां, अधोसंरचना विकास पर सरकार खर्चेगी 735 करोड़ रुपए
रायपुर में अधोसंरचना विकास के लिए सरकार 735 करोड़ रुपए खर्च करेगी। भूमि स्वामियों की विकसित जमीन में 42 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।
न्यू रायपुर ड्रोन व्यू
रायपुर। पुराने रायपुर शहर को नवा रायपुर से जोड़ने के लिए 432 हेक्टेयर क्षेत्र में एक कनेक्टिंग टाउन बनाने की योजना को सरकार का अनुमोदन मिल गया है। खास बात ये है कि नवा रायपुर जाने वाले एक्सप्रेस वे की दोनों तरफ 500-500 मीटर के दायरे में यह विकास किया जाएगा।
इस पर 735 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस योजना के दायरे में आने वाले गांवों की जमीनें लेकर उसका विकास किया जाएगा और भूमि स्वामियों को 42 प्रतिशत जमीन दी जाएगी।
ये है योजना
यह योजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण ने तैयार की है। योजना का मकसद पुराने रायपुर शहर और नवा रायपुर को के बीच के गैप को खत्म करने की है। यही कारण है कि 432 हेक्टेयर क्षेत्र में यह योजना दोनों शहरों के बीच के हिस्से पर केंद्रित की गई है।
ये गांव शामिल होंगे योजना में
इस विकास योजना में जोरा माल के आगे से नवा रायपुर एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ के हिस्से में सेरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रीको, दूसरी ओर पर गांव नकटी, रमचंडी और बरौदा ( एयरपोर्ट) के आसपास का हिस्सा शामिल होगा। नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण की इस योजना का सरकार ने अनुमोदन कर दिया है। दोनों शहरों को जोड़ने की इस योजना को हम अभी कनेक्टिंग टाउन के रूप में देख रहे हैं, सरकारी दस्तावेज में इसे नगर विकास योजना का नाम दिया गया है। यह पूरा हिस्सा नवा रायपुर के लेयर टू में शामिल है।
जमीन का अधिग्रहण नहीं, पर 43 फीसदी जमीन मिलेगी
इस योजना का एक महत्वपूर्ण बिंदु ये है कि इस कनेक्टिंग टाउन के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। जो भूमि योजना क्षेत्र में शामिल होगी वहां विकास किया जाएगा। सड़क, पानी, नाली, बिजली आदि की व्यवस्था होने के बाद विकसित क्षेत्र में संबंधित भूमि स्वामियों को उनकी कुल जमीन का 42 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। नगर विकास योजना इसके छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित होने होने के साथ ही अब लागू हो गई है।
अंतिम भूखण्डों का आवंटन और उसके बाद कब्जा
सरकार ने साफ किया है कि, अंतिम नगर विकास योजना में सम्मिलित भूखण्डों की सूची को भू-स्वामित्व या भू-अभिलेखों के सत्यापन के रूप में नहीं माना जायेगा, जो छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व विभाग के अद्यतन भू-अभिलेखों के अनुसार सत्यापन के अधीन होगा। अंतिम भूखण्डों का आवंटन और उसके बाद अंतिम भूखण्डों पर कब्जा, भू-स्वामी के अद्यतन और प्रमाणित भू-स्वामित्व अभिलेखों के उचित सत्यापन के बाद किया जाएगा।