दल्लीराजहरा- जगदलपुर रेल परियोजना अधूरी: फॉरेस्ट क्लीयरेंस के बिना लटका काम, लोगों को अब भी इंतजार
दल्लीराजहरा- जगदलपुर (235 किमी) बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना बस्तर के लिए केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा मानी जा रही है।
दल्लीराजहरा- जगदलपुर रेल परियोजना
अनिल सामंत- जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दल्लीराजहरा- जगदलपुर (235 किमी) बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना बस्तर के लिए केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा मानी जा रही है। दो चरणों में बन रही इस परियोजना का पहला चरण दल्लीराजहरा–रावघाट (95 किमी) लगभग पूर्णता की ओर है। अंतागढ़ और ताडोकी तक रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि रावघाट (सरंगीपाल) तक ट्रैक निर्माण कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। दिसंबर 2025 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे बस्तर को उत्तर छत्तीसगढ़ से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
रावघाट- जगदलपुर (140 किमी) दूसरे चरण को लेकर तस्वीर उतनी स्पष्ट नहीं है। भूमि अधिग्रहण (लगभग 266 हेक्टेयर) और सर्वे का कार्य जारी है, वहीं जगदलपुर से रावघाट की ओर निर्माण की शुरुआती गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। परियोजना लागत बढ़कर 3513 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिसे केंद्रीय रेल मंत्रालय की स्वीकृति भी मिल चुकी है। केंद्रीय रेल मंत्री ने अपने बजट भाषण में इसे बस्तर के रेल विकास की महत्वाकांक्षी परियोजना बताते हुए खास तौर पर उल्लेख किया, जिससे दूसरे चरण के शीघ्र प्रारंभ की उम्मीद जगी है। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस से जुड़ी औपचारिकताओं में लापरवाही सामने आ रही है।
वन नुकसान के आकंड़े रेलवे को दिए जा चुके
सीसीएफ आलोक तिवारी ने कहा कि, जगदलपुर- कोंडागांव खंड में लगभग 300 हेक्टेयर सीए लैंड पर पौधरोपण किया जाना है, जिसकी लागत रेलवे को वहन करनी है। लेकिन अब तक पेड़ कटाई और पौधरोपण की निर्धारित राशि वन विभाग को जमा नहीं की गई है। इससे परियोजना में देरी की आशंका और गहराती जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के बीच इस परियोजना की जिम्मेदारी आरवीएनएल और इरकॉन को सौंपी गई है। बस्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास और रायपुर से सीधे रेल संपर्क के लिए यह परियोजना निर्णायक मानी जा रही है।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस में देरी से अटका दूसरा चरण
दल्लीराजहरा से जगदलपुर तक रेल लाइन निर्माण के पहले चरण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। जबकि दूसरे चरण में जगदलपुर से रावघाट के बीच लाइन बिछाई जानी है। इस खंड में पेड़ कटाई से होने वाले वन नुकसान के आंकड़े वन विभाग द्वारा रेलवे को सौंप दिए गए हैं। शर्तों के अनुसार रेलवे को विधिवत प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर शुल्क जमा करना आवश्यक है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किए जाने के कारण फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। परिणामस्वरूप लाइन बिछाने का कार्य फाइलों में उलझा हुआ है और बस्तरवासियों को रेल सुविधा का इंतजार लंबा होता जा रहा है।