बस्तर की बेटी ने हैदराबाद में लहराया परचम: त्रिभाषा सम्मेलन में अपनी कविताओं और गीतों से लोगों को किया मंत्रमुग्ध
हैदराबाद में 10 जनवरी को आयोजित विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर त्रिभाषा सम्मेलन ने भारतीय भाषाई संस्कृति का भव्य और आत्मीय स्वरूप प्रस्तुत किया।
त्रिभाषा सम्मेलन में प्रस्तुति देतीं अंजली तिवारी
अनिल सामंत- जगदलपुर। हैदराबाद में 10 जनवरी 2026 को आयोजित विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर त्रिभाषा सम्मेलन ने भारतीय भाषाई संस्कृति का भव्य और आत्मीय स्वरूप प्रस्तुत किया। संस्कृत, तेलुगु और हिन्दी के इस ऐतिहासिक संगम में जब बस्तर की आवाज़ गूंजी, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। यह केवल एक प्रस्तुति नहीं थी। बल्कि, उस माटी का सम्मान था, जो छोटे क्षेत्र से निकलकर बड़े मंचों पर अपनी पहचान बनाती है।
इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में देशभर से नामचीन साहित्यकार, भाषा-विशेषज्ञ और चिंतक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में हिन्दी को अधिकाधिक क्षेत्रों में अपनाने, सरकारी व सामाजिक कामकाज में इसके व्यापक उपयोग और हिन्दी को राष्ट्रभाषा का विधिवत दर्जा दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है,जो विविधताओं को जोड़कर एकता का सेतु बनाती है।
अंजली तिवारी मिश्रा ने अपनी कविताओं से लोगों को किया मंत्रमुग्ध
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रभावशाली क्षण तब आया, जब बस्तर,जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से पहुंची हिन्दी साधिका अंजली तिवारी मिश्रा ने अपनी स्वर-लहरियों से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविता और भजन तोरा मन दर्पण कहलाए, मोरा हिन्दी सबको भाये, सबको एक बनायें, सबके दिलों में राज करें,किसी से ना भेदभाव करायेइन पंक्तियों ने श्रोताओं के हृदय को छू लिया। प्रस्तुति के समापन पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर चेहरे पर भावनाओं की छाया थी और हर दिल में हिन्दी के लिए नया सम्मान। महानगरों से आए दिग्गज साहित्यकारों के बीच खड़े होकर अपनी कला को निर्भीकता,गर्व और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना, किसी साधारण उपलब्धि का संकेत नहीं था। यह उस संघर्ष, साधना और संकल्प का परिणाम था,जो हर कदम पर चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ता है।
बस्तर अंचल की पहचान थी यह प्रस्तुति
प्रस्तुति न केवल एक व्यक्ति की वर्ण बस्तर की पहचान थी। यह प्रस्तुति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे बस्तर अंचल की पहचान थी। एक ऐसा क्षेत्र, जिसकी प्रतिभाएं अब राष्ट्रीय मंचों पर अपने नाम की रोशनी बिखेर रही हैं। यह सिद्ध हो गया कि ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए पहले संघर्ष की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और जब संकल्प सच्चा हो, तो ईश्वर का आशीर्वाद स्वतः साथ चलता है। अंजली तिवारी मिश्रा ने इस ऐतिहासिक त्रिभाषा सम्मेलन में बस्तर का गौरव बढ़ाने वाली यह प्रेरणादायी प्रस्तुति दी।