रसोइयों की हड़ताल: स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था डगमगाई, वैकल्पिक इंतज़ामों से चल रहा काम
रसोइयों की हड़ताल को देखते हुए अफसरों के निर्देशों के दबाव में हैं शिक्षक। कहीं स्वसहायता समूह तो कहीं चतुर्थ वर्ग कर्मचारी बना रहे हैं भोजन।
मध्यान्ह भोजन की जगह बच्चों को खाने के लिए बिस्कुट दे रहे
अनिल सामंत- जगदलपुर। प्रदेशभर में रसोइयों की हड़ताल का असर अब सरकारी स्कूलों में साफ नजर आने लगा है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत बच्चों को मिलने वाला भोजन कई स्कूलों में प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए शिक्षक और स्कूल प्रबंधन वैकल्पिक, अस्थायी और अनौपचारिक इंतज़ामों के सहारे काम चला रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार रसोइयों के हड़ताल पर चले जाने के बाद स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में मध्यान्ह भोजन योजना बंद नहीं होनी चाहिए। आदेशों के दबाव में कई स्कूलों में महिला स्वसहायता समूहों से मान-मनौवल कर भोजन बनवाया जा रहा है, तो कई जगह चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों से यह जिम्मेदारी निभवाई जा रही है।
भोजन बंद हुआ तो संस्था प्रमुख पर कार्यवाही
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक प्राथमिक शाला के प्रधान अध्यापक ने बताया कि, बीईओ कार्यालय से सख्त निर्देश हैं कि भोजन बंद हुआ तो संस्था प्रमुख पर कार्रवाई तय है। ऐसे में कई स्कूलों में शिक्षक आपस में चंदा कर प्रतिदिन मजदूरी देकर गांव से लोगों को बुलाकर भोजन बनवा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई जगह निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं बन पा रहा है और केवल दाल-चावल या खिचड़ी के सहारे बच्चों का पेट भरने की व्यवस्था की जा रही है। ब्लॉक स्तर पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा गया कि, कुल 351 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन संचालित है, जिनमें से लगभग 125 स्कूल रसोइयों की हड़ताल से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं, हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से भोजन निरंतर जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऐसे है जमीनी हालात
रसोइयों की हड़ताल के चलते नियमित एमडीएम व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्कूलों में स्वसहायता समूहों से अस्थायी तौर पर खाना बनवाया जा रहा है, जबकि कुछ जगह चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों या दैनिक मजदूरों की मदद ली जा रही है। शिक्षक चंदा कर मजदूरी दे रहे हैं ताकि योजना बंद न हो। मेन्यू के अनुरूप भोजन नहीं बन पा रहा, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के डर से किसी भी तरह बच्चों को खाना उपलब्ध कराया जा रहा है।
महिला स्वसहायता समूहों को सौंपी गई जिम्मेदारी : डीईओ
रसोइयों की प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जिला शिक्षा अधिकारी बीएल बघेल ने कहा है कि, जिले में मध्यान्ह भोजन योजना प्रभावित नहीं हुई है। बच्चों को भोजन नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी थी, जिससे किसी भी स्कूल में योजना बाधित नहीं हुई है।
प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि रसोइयों के हड़ताल पर जाने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए महिला स्वसहायता समूहों को मध्यान्ह भोजन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह व्यवस्था जिले के सातों ब्लॉकों में लागू की गई है, जिससे बच्चों को समय पर भोजन मिल रहा है। हालांकि कुछ स्कूलों में अस्थायी समायोजन की आवश्यकता पड़ी, लेकिन कहीं भी मध्यान्ह भोजन योजना बंद नहीं की गई है।
प्रशासन ने बनाई वैकल्पिक रणनीति : बीईओ
रसोइयों की हड़ताल पर राजेश गुप्ता बीईओ ने कहा कि, हड़ताल को देखते हुए महिला स्वसहायता समूहों को एमडीएम संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। जिले के सभी सातों ब्लॉकों में यह व्यवस्था लागू है। स्कूलों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्थिति में मध्यान्ह भोजन बंद नहीं होना चाहिए। प्रशासन द्वारा निरंतर निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों को नियमित रूप से भोजन मिलता रहे।