दुष्कर्म केस में डॉक्टर को राहत नहीं: एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से हाईकोर्ट का इंकार
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में आदेश पारित करते हुए एफआईआर, चार्जशीट और संज्ञान आदेश को रद्द क्वैश करने से इंकार कर दिया है।
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दुष्कर्म के गंभीर आरोपों से जुड़े एक मामले में आदेश पारित करते हुए एफआईआर, चार्जशीट और संज्ञान आदेश को रद्द क्वैश करने से इंकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ता विजय उमाकांत लातूर महाराष्ट्र के निवासी हैं, और पेशे से एमएस ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। उनके खिलाफ भिलाई नगर, जिला दुर्ग में वर्ष 2018 में अपराध दर्ज किया गया था।
आरोप है कि, उन्होंने विवाह का झूठा आश्वासन देकर शिकायतकर्ता से दो बार शारीरिक संबंध बनाए। जांच के बाद 3 अक्टूबर 2025 को धारा 376 आईपीसी के तहत चार्जशीट पेश की गई, जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग द्वारा संज्ञान ले लिया गया। इसी के खिलाफ आरोपी डॉक्टर ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
अलिबी, सहमति, देरी और झूठे आरोप जैसे तर्क ट्रायल के विषय हैं
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ मामलों का हवाला देते हुए कहा कि, एफआईआर या चार्जशीट को रद्द करने की शक्ति अत्यंत सीमित और दुर्लभ मामलों में ही प्रयोग की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, इस स्तर पर सबूतों की जांच या मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता। अलिबी, सहमति, देरी और झूठे आरोप जैसे तर्क ट्रायल के विषय हैं।
खातेदारों की जानकारी देने बैंक को दिया अंतिम अवसर
भिलाई के सुपेला स्थित यस बैंक में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यस बैंक को सभी खातेदारों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने संबंधी स्पष्ट निर्देश हाईकोर्ट ने दिए हैं।
यस बैंक की शाखा में लगभग 165 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला
हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, सुपेला स्थित यस बैंक की शाखा में लगभग 165 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि अनिमेष सिंह के नाम से खोले गए एक खाते में कुल 457 बैंक खातों से लेनदेन किया गया। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 10 मार्च निर्धारित की है। यस बैंक की ओर से 285 खातेदारों की पूरी जानकारी अब तक नहीं जुटाए जाने की बात कही गई। बैंक द्वारा जांच में अपेक्षित सहयोग न किए जाने को लेकर राज्य की ओर से जांच अधिकारी ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया, जिस पर न्यायालय ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।