दिव्यांग बनकर अधिकारी बनने आए 13 अभ्यर्थी गायब: नौकरी देने दूसरी बार बुलाया, फिर भी नहीं आए

छत्तीसगढ़ में आरईएओ के पद के लिए व्यापमं से परीक्षा दिलाकर पास हुए 13 लोगों को जब नौकरी देने के पहले प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बुलाया, तो वे सारे भाग निकले।

Updated On 2026-01-30 10:44:00 IST

File Photo 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी यानी आरईएओ के पद के लिए व्यापमं से परीक्षा दिलाकर पास हुए 13 लोगों को जब नौकरी देने के पहले प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बुलाया, तो वे सारे भाग निकले। हरिभूमि ने इस संबंध में 18 जनवरी को प्रमुखता से प्रकाशित समाचार में संदेह जताया था कि ये सभी लोग फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर बहरे यानी श्रवण बाधित बनकर आए थे। यह संदेह अब सच साबित हुआ है। दोबारा तलब किए जाने के बावजूद वे नहीं आए।

बहरे बनकर फर्जी प्रमाणपत्र का सहारा
मूल प्रमाण पत्रों की जांच से गायब होने वालों को फर्जी प्रमाण पत्र धारी के रूप में देखे जाने के पीछे दरअसल आशंका की वजह ये है कि राज्य में अब तक 153 लोगों के नाम फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के मामले में सामने आ चुके हैं। जो लोग पकड़ में आए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। दूसरी तरफ राज्य में इस प्रकार के फर्जियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।

फर्जी है इसलिए भागे अब जांच होनी चाहिए
छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर ने इस मामले में कहा है, हमने पहले भी आशंका जताई थी कि ये मूल प्रमाणपत्रों की जांच से भागे 13 अभ्यर्थी फर्जी प्रमाणपत्र धारी हो सकते हैं, अब ये आशंका सच हो गई है। अब हमारा ये कहना है कि इन लोगों को किसी हाल में छोड़ा नहीं जाना चाहिए। इनके प्रमाणपत्रों की जांच होनी चाहिए। शासन-प्रशासन के लिए इस तरह के लोगों का सहयोग भी करते हैं।

ये है मामला
राज्य सरकार के संचालनालय कृषि ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 321 पदों पर सीधी भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा पास करने वालों में से 14 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। ये सभी श्रवण बाधित श्रेणी (बहरे) के थे, लेकिन इनमें से केवल एक ही मूल प्रमाणपत्रों की जांच कराने पहुंचा। बाकी के 13 गैरहाजिर रहे। मूल प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों के आधार पर उनकी पात्रता, अपात्रता की छानबीन करने के लिए बनी समिति ने सभी अनुपस्थित लोगों को अपात्र घोषित कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही कहा गया है कि अपात्र हुए आवेदकों को यदि कोई आपत्ति है, तो वे 23 जनवरी तक खुद पेश होकर दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। दावे के पक्ष में उन्हें वांछित दस्तावेज अभिलेख सहित अभ्यावेदन पेश करना होगा। हरिभूमि की खबर में आशंका जताई गई थी कि ये सारे लोग फर्जी प्रमाणपत्र धारी हैं, इसलिए पकड़े जाने के डर से वे गैरहाजिर रहे। 23 जनवरी को भी इन 13 में से कोई भी अभ्यर्थी नहीं आया। लिहाजा यह संदेह सच साबित हुआ।

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